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होली पर लौटीं खुशियां: मां-बाप को मिल गया बिछड़ा बेटा, गले लगाकर खूब रोए
Mon, 06 Mar 2023 02:47 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 06 Mar 2023 02:47 PM IST
सार
चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अपने एक मित्र के सहयोग से बिहार में उस बालक के परिजनों को ढूंढ निकाला। उसके परिजनों को आगरा बुलाया गया कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर बच्चे को सौंपा गया।
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लापता बालक के साथ उसके माता पिता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार से लापता बालक कागारौल में मिला था। 14 दिन बाद बच्चे के परिजन आ गए। बेटे के मिलने से मां-बाप की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार में होली की खुशियां दोगुनी हो गईं। चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस के प्रयासों से माता-पिता को होली से पहले बड़ा उपहार मिला।
सात साल का बालक राजकीय बाल गृह आगरा में निरुद्ध था। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अपने एक मित्र के सहयोग से बिहार में उस बालक के परिजनों को ढूंढ निकाला। उसके परिजनों को आगरा बुलाया गया कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर बच्चे को सौंपा गया। जैसे ही माता पिता को उनका बच्चा मिला, उनकी आंखों से खुशी के आंसू नहीं रुके। बेटे को गले लगा कर मां खूब रोई और बेटे के मिलने के लिए नरेश पारस को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
पिछले 12 दिनों से बिहार का एक बालक राजकीय बाल गृह आगरा में निरुद्ध था। वह कागरोल में लावारिस घूमते हुए मिला था। जिसे पुलिस ने बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। काउंसिलिंग में बालक ने बताया कि दो युवक उसे चॉकलेट दिलाने के बहाने ले आए थे। इसके बाद छोड़कर चले गए। उसने खुद को बिहार के चिरका पत्थर का रहने वाला बताया। इसके अलावा कोई जानकारी नहीं दी। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि चिरका पत्थर नाम का गांव बिहार के जुमई और बांका जिले में है। उन्होंने झारखंड की संस्था साथी के माध्यम बच्चे के बारे में पता किया। बच्चे के बारे में जुमई जिले से जानकारी मिली।
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ये भी पढ़ें - हैवान बना दूल्हा: शादी के बाद हनीमून के लिए गए शिमला, दुल्हन से की ऐसी डिमांड, मना करने पर किया खौफनाक हाल
उसके मां-बाप से संपर्क हो गया। शनिवार को बच्चे की मां कुसुमा देवी, पिता रामचंद्र सहित अन्य लोग आगरा पहुंचे। बालक ने मां-बाप को पहचान लिया। वह दौड़कर मां से लिपट गया। इस पर मां-बाप को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। मां का कहना था कि होली से पहले बेटा मिल गया। इससे काफी खुशी मिली है। अब वो सुकून से त्योहार मना सकेंगे।
बाल कल्याण समिति ने लिखा पढ़ी करके बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान बाल कल्याण समिति के सदस्य निमेष बेताल सिंह, अर्चना उपाध्याय, बालगृह के अधीक्षक ऋषि कुमार सहित कर्मचारी तथा नरेश पारस मौजूद रहे। बिछड़ा हुआ बच्चा पाकर मां-बाप बहुत खुश थे। उनका कहना था कि बच्चा उन्हें होली के त्यौहार पर उपहार के रूप में मिला है। यह होली यादगार बन गई। परिजन नरेश पारस को बार-बार धन्यवाद दे रहे थे।
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सात साल का बालक राजकीय बाल गृह आगरा में निरुद्ध था। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अपने एक मित्र के सहयोग से बिहार में उस बालक के परिजनों को ढूंढ निकाला। उसके परिजनों को आगरा बुलाया गया कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर बच्चे को सौंपा गया। जैसे ही माता पिता को उनका बच्चा मिला, उनकी आंखों से खुशी के आंसू नहीं रुके। बेटे को गले लगा कर मां खूब रोई और बेटे के मिलने के लिए नरेश पारस को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
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पिछले 12 दिनों से बिहार का एक बालक राजकीय बाल गृह आगरा में निरुद्ध था। वह कागरोल में लावारिस घूमते हुए मिला था। जिसे पुलिस ने बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। काउंसिलिंग में बालक ने बताया कि दो युवक उसे चॉकलेट दिलाने के बहाने ले आए थे। इसके बाद छोड़कर चले गए। उसने खुद को बिहार के चिरका पत्थर का रहने वाला बताया। इसके अलावा कोई जानकारी नहीं दी। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि चिरका पत्थर नाम का गांव बिहार के जुमई और बांका जिले में है। उन्होंने झारखंड की संस्था साथी के माध्यम बच्चे के बारे में पता किया। बच्चे के बारे में जुमई जिले से जानकारी मिली।
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उसके मां-बाप से संपर्क हो गया। शनिवार को बच्चे की मां कुसुमा देवी, पिता रामचंद्र सहित अन्य लोग आगरा पहुंचे। बालक ने मां-बाप को पहचान लिया। वह दौड़कर मां से लिपट गया। इस पर मां-बाप को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। मां का कहना था कि होली से पहले बेटा मिल गया। इससे काफी खुशी मिली है। अब वो सुकून से त्योहार मना सकेंगे।
बाल कल्याण समिति ने लिखा पढ़ी करके बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान बाल कल्याण समिति के सदस्य निमेष बेताल सिंह, अर्चना उपाध्याय, बालगृह के अधीक्षक ऋषि कुमार सहित कर्मचारी तथा नरेश पारस मौजूद रहे। बिछड़ा हुआ बच्चा पाकर मां-बाप बहुत खुश थे। उनका कहना था कि बच्चा उन्हें होली के त्यौहार पर उपहार के रूप में मिला है। यह होली यादगार बन गई। परिजन नरेश पारस को बार-बार धन्यवाद दे रहे थे।