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पनवारी कांड: भाजपा विधायक जिस केस में हुए बरी, अब हाईकोर्ट में होगी सुनवाई, जानें पूरा मामला
Sun, 13 Nov 2022 10:01 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 13 Nov 2022 10:01 PM IST
सार
पनवारी कांड मामले में वादी पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जिसके बाद सुनवाई के लिए पांच दिसंबर की तारीख नियत की गई है।
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विधायक बाबूलाल चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के 32 साल पुराने बहुचर्चित पनवारी कांड में भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल सहित आठ आरोपी अदालत से बरी हो गए थे। वादी भरत सिंह कर्दम ने अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की है। उच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए आगरा की विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में विचार और कार्रवाई से संबंधित पत्रावलियां तलब की हैं। राज्य सरकार से भी जवाब मांगा है। सुनवाई के लिए 5 दिसंबर नियत की है।
जाटव महापंचायत के पदाधिकारियों ने रविवार को इस संबंध में प्रेसवार्ता करके जानकारी दी। इसमें वादी भरत सिंह कर्दम भी मौजूद रहे। उनका कहना था कि वर्ष 1990 में पनवारी कांड हुआ था। इस मामले में 4 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ वादी भारत सिंह कर्दम ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता केके द्विवेदी के माध्यम से उच्च न्यायलाय में अपील दायर की है।
अपील के साथ भरत सिंह कर्दम ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि फैसला न्याय पूर्ण नहीं है। उच्च न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। स्पेशल जज एमपी एमएलए नीरज गौतम की कोर्ट से पूरा रिकॉर्ड, अन्य दस्तावेज और कार्रवाई से संबंधित पत्रावलियां तलब की हैं।
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घटनाक्रम 21 जून 1990 का है। सिकंदरा के गांव पनवारी निवासी चोखेलाल की बेटी मुंद्रा की शादी होनी थी। सदर के नगला पद्मा से रामदीन की बरात आई थी। जाट समाज के लोगों ने बरात चढ़ाने का विरोध किया था। इस कारण बरात नहीं चढ़ सकी। दूसरे दिन पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में बरात चढ़ाई की जा रही थी। तब पांच-छह हजार लोगों की भीड़ ने बरात को चढ़ने से रोका था। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग किया था। फायरिंग तक करनी पड़ी थी। गोली लगने से सोनी राम जाट की मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद गांव से लेकर शहर तक हिंसा भड़क गई थी। कर्फ्यू तक लगाया गया था। पीएसी के साथ सेना भी लगी थी। घटना से देश की राजनीति भी गर्मा गई थी। अदालत में सुबूत पेश करने में पुलिस नाकाम रही थी। उस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। प्रधानमंत्री वीपी सिंह थे। तब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, पत्नी सोनिया गांधी के साथ आगरा आए थे। गांव पनवारी भी गए थे।
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जाटव महापंचायत के पदाधिकारियों ने रविवार को इस संबंध में प्रेसवार्ता करके जानकारी दी। इसमें वादी भरत सिंह कर्दम भी मौजूद रहे। उनका कहना था कि वर्ष 1990 में पनवारी कांड हुआ था। इस मामले में 4 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ वादी भारत सिंह कर्दम ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता केके द्विवेदी के माध्यम से उच्च न्यायलाय में अपील दायर की है।
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अपील के साथ भरत सिंह कर्दम ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि फैसला न्याय पूर्ण नहीं है। उच्च न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। स्पेशल जज एमपी एमएलए नीरज गौतम की कोर्ट से पूरा रिकॉर्ड, अन्य दस्तावेज और कार्रवाई से संबंधित पत्रावलियां तलब की हैं।
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