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Corona Virus: 'जरूरत से अधिक उपाए-बीमारी के लक्षण', पत्नी-बच्चों से भी दूरी बनाई, मानिए चिकित्सक की सलाह

Mon, 13 Apr 2020 12:01 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 13 Apr 2020 12:01 AM IST
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Panic Of Corona Virus Use Hand Wash Many Times Wounds Injured
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस के खौफ से कुछ लोग जरूरत से ज्यादा एहतियात बरत रहे हैं ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। पत्नी-बच्चों से भी एक मीटर की दूरी बरत रहे हैं। हाथों को हर 15-20 मिनट बाद धो रहे हैं, जबकि वह किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में भी नहीं रहे। इससे हाथों में नमी की कमी से जख्म हो गए हैं। 
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कोरोना वायरस के शहर में मरीज मिलने के बाद लोगों में दहशत बढ़ गई है। चिकित्सकों के सुझावों को समझे बिना बेवजह अमल में ला रहे हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास आ रहे फोन पर मरीज बार-बार हाथों को धोना, रिमोट, मोबाइल, दरवाजे को दिन में पांच से सात बार साफ करना, कोरोना वायरस की डरावनी बातें करना, जैसी समस्या बता रहे हैं।
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चिकित्सकों ने पूछा कि यह प्रक्रिया किसी बाहरी के आने या फिर बाहर से लौटने के बाद करते हैं, तो पता चला कि ऐसा कुछ भी नहीं है। घर में रहते हुए भी ऐसा किया जा रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसा होने से डिप्रशेन का खतरा अधिक है। 
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केस स्टडी एक: 
42 साल के एक महाशय लॉकडाउन होने के बाद अधिकांश समय अपने कमरे में रहते हैं। पत्नी और बच्चों से बात करते वक्त एक मीटर की दूरी रखते हैं। दिन में 18 से 22 बार हाथों को साबुन से धोते हैं। पत्नी और बच्चों से भी ऐसा ही करने को कहते हैं, मना करने पर झगड़ते हैं। चिकित्सकों से काउंसिलिंग कराने के बाद उनकी मनोदशा में सुधार हुआ है।

केस स्टडी दो: 
बल्केश्वर में रहने वाले 35 साल के एक व्यक्ति कोरोना वायरस को लेकर हर वक्त बात करते रहते हैं। बार-बार टीवी, मोबाइल, दीवार, गेट और खिड़कियों को साफ करते हैं। बच्चों को भी अपने गांव में छोड़ आए हैं। इनकी पत्नी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से कोई बाहर से घर नहीं आ रहा है। हम भी कहीं नहीं जा रहे, लेकिन यह बार-बार दीवार, फर्श को साफ करते हैं, टोकने पर कोरोना का भय दिखाते हैं। 
 

जरूरत से ज्यादा उपाय, बीमारी के लक्षण : डॉ. यूसी गर्ग
वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि कोरोना वायरस की बातें करने से बजाय सावधानी और सतर्कता बरतें, लेकिन बाहर जाए और किसी के आए बिना बार-बार हाथों को धोना और स्वस्थ परिजनों से भी दूरी बना रहे हैं तो यह सर्तकता नहीं बीमारी के लक्षण हैं। ऐसा होने पर चिकित्सकों से परामर्श जरूरी है, ऐसी समस्या बताने वाले मरीजों की काउंसिलिंग भी कर रहे हैं। 

सामाजिक तंत्र टूटने से मनोस्थिति पर पड़ा प्रभाव : प्रो. मोहम्मद अरशद
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान सस्थान के प्रो. मोहम्मद अरशद ने बताया कि लोगों को सामाजिक तानाबाना टूटने से भी यह स्थिति बन रही हैं।

लोगों से मिलना-जुलाना, घूमना, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना उसकी प्राकृतिक शैली है। कोरोना वायरस से उसकी सामाजिक जीवनशैली खत्म हो गई है, लेकिन यह अस्थायी है, लोगों को यह भाव रखने चाहिए। 

इन बातों का रखें ख्याल
- किसी के संपर्क में आएं या फिर बाहर से कोई आए तो ही हाथ साफ करें।
- घर में कोई बुखार-जुकाम-खांसी, टीबी का मरीज है तो ही उससे दूरी बनाएं।
- कोरोना वायरस के मामलों की सूचना भर के लिए समाचार देखें। 
- संगीत सुनें, कविता और कहानी लिखें, पेंटिंग बना सकते हैं। 
- ऐसे लोगों को व्यस्त रखने का प्रयास करें, विशेषज्ञों से काउंसिलिंग कराएं।


 
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