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पंडित जसराज का वृंदावन से घर जैसा रहा नाता, श्रीराधारमण मंदिर में कई बार गूंजे उनके स्वर
Tue, 18 Aug 2020 01:10 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 18 Aug 2020 01:10 AM IST
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पंडित जसराज
- फोटो : Twitter
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भारतीय शास्त्रीय संगीत के पुरोधाओं में शुमार प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का निधन हो गया। वो 90 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही तीर्थनगरी वृंदावन में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत की दुनिया की विश्वविख्यात हस्ती का वृंदावन से घर जैसा नाता रहा है। अनेक बार उन्होंने श्रीराधारमण जी के आंगन में समाज गायन कर अपनी हाजिरी लगाई है।
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आध्यात्मिक गुरु श्रीवत्स गोस्वामी बताते हैं कि बीते 40 वर्ष के दौरान कई बार पंडित जसराज वृंदावन आए थे। उनकी अंतिम वृंदावन यात्रा फरवरी 2018 में हुई थी। उनके पिता पुरुषोत्तम गोस्वामी को वे गुरु मानते थे। यही कारण है कि वृंदावन पंडित जसराज के लिए घर आंगन जैसा रहा है।
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1982 में ध्रुपद मेला में दी थी प्रस्तुति
उन्होंने बताया कि पंडित जसराज जब भी वृंदावन आते श्रीराधारमण जी के दर्शन अवश्य करते। कई बार होली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पंडित जी ने समाज गायन श्रीराधा रमण जी के समक्ष पुरुषोत्तम गोस्वामी और वेणुगोपाल गोस्वामी के साथ किया। 1982 में ध्रुपद मेला के दौरान पंडित जसराज ने अपनी प्रस्तुति दी थी।
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इससे पूर्व 1975 में सूर पदावली के एलपी रिकॉर्ड का विमोचन भी उन्होंने जयसिंह घेरा पर ही किया था। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय कलाकार मौजूद रहे। श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि सोमवार को उनकी बेटी का फोन आया कि अमेरिका में पंडित जी ने अपना शरीर त्याग दिया है।
90 वर्षीय पंडित जसराज का निधन अमेरिका के न्यूजर्सी में हुआ। पंडित जसराज का सबसे बड़ा योगदान शास्त्रीय संगीत को जनता के लिए सरल और सहज बनाना रहा जिससे उसकी लोकप्रियता बढ़ी। उन्होंने ख्याल गायकी में ठुमरी का पुट डाला जो सुनने वालों के कानों में मिसरी घोल जाता था। वह बंदिश भी अपने जसरंगी अंदाज में गाते थे ।
संबंधित खबर- पंडित जसराज : शास्त्रीय गायकी को सरल बनाने वाले संगीत मार्तंड की जीवन यात्रा
90 वर्षीय पंडित जसराज का निधन अमेरिका के न्यूजर्सी में हुआ। पंडित जसराज का सबसे बड़ा योगदान शास्त्रीय संगीत को जनता के लिए सरल और सहज बनाना रहा जिससे उसकी लोकप्रियता बढ़ी। उन्होंने ख्याल गायकी में ठुमरी का पुट डाला जो सुनने वालों के कानों में मिसरी घोल जाता था। वह बंदिश भी अपने जसरंगी अंदाज में गाते थे ।
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