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मैनपुरी में महिला के लिए आरक्षित हुई जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी
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जिला पंचायत कार्यालय
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सबसे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण तय हो गया है। शुक्रवार को शासन ने आरक्षण निर्धारित करते हुए प्रदेश भर की सूची जारी कर दी। सूची जारी होने के बाद अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे कयासों पर विराम लग गया है।
वर्ष 2021 में प्रस्तावित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए आरक्षण पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं। शासन से ही ये आरक्षण जारी किया जाना था। शुक्रवार को शासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी पत्र में सभी 75 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों का आरक्षण तय कर दिया गया।
मैनपुरी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित की है। ऐसे में साफ हो गया है कि हर वर्ग को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो-दो हाथ करने का मौका मिलेगा। एक ओर जहां इससे हर वर्ग की महिलाओं को मिलेगा तो वहीं मुकाबला और कड़ा हो जाएगा। वर्ष 2015 में हुए चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित थी।
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प्रत्याशी पर कार्यकर्ताओं की नजर
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अब तक राजनीतिक दलों ने पत्ते नहीं खोले थे। सभी को आरक्षण निर्धारण का ही इंतजार था। आरक्षण जारी होने के बाद अब जनता और कार्यकर्ता दोनों की निगाह प्रत्याशी पर है। कार्यकर्ता अब पार्टी के निर्णय को जानना चाहते हैं। अब देखना ये है कि पार्टी किस पर भरोसा जताती है।
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वर्ष 2021 में प्रस्तावित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए आरक्षण पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं। शासन से ही ये आरक्षण जारी किया जाना था। शुक्रवार को शासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी पत्र में सभी 75 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों का आरक्षण तय कर दिया गया।
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मैनपुरी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित की है। ऐसे में साफ हो गया है कि हर वर्ग को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो-दो हाथ करने का मौका मिलेगा। एक ओर जहां इससे हर वर्ग की महिलाओं को मिलेगा तो वहीं मुकाबला और कड़ा हो जाएगा। वर्ष 2015 में हुए चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित थी।
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प्रत्याशी पर कार्यकर्ताओं की नजर
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अब तक राजनीतिक दलों ने पत्ते नहीं खोले थे। सभी को आरक्षण निर्धारण का ही इंतजार था। आरक्षण जारी होने के बाद अब जनता और कार्यकर्ता दोनों की निगाह प्रत्याशी पर है। कार्यकर्ता अब पार्टी के निर्णय को जानना चाहते हैं। अब देखना ये है कि पार्टी किस पर भरोसा जताती है।