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कोरोना संकट के बीच बढ़ा डायरिया का प्रकोप, गर्मी में नौनिहालों का रखें विशेष ख्याल

Tue, 16 Jun 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 16 Jun 2020 12:02 AM IST
सार

  • डायरिया से बच्चों का बुरा हाल, हर दूसरे को उल्टी-दस्त से पानी की कमी
  • बाल रोग विभाग भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी

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outbreak of diarrhea amid corona crisis in agra
एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में बच्चों को उल्टी-दस्त होने पर अभिभावकों की देरी से हालत गंभीर हो रही है। चिकित्सकों के पास आ रहे हर दूसरे बच्चे को डायरिया है, हर पांचवें को भर्ती करना पड़ रहा है। पानी की कमी से इनके होंठ सूख रहे और पेट की खाल भी सिकुड़ रही है।  

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एसएन मेडिकल कॉलेज में रोजाना बाल रोग विभाग की इमरजेंसी ओपीडी में 40 से 50 मरीज आ रहे हैं। इसमें 15 से 20 मामले उल्टी-दस्त, बुखार के हैं। इनमें 10-15 की हालत गंभीर मिली, लगातार दस्तों से पानी की कमी हो गई। आंखों के नीचे गड्ढे पड़ गए। दो-तीन बच्चे तो ऐसे रहे, जिनका पेशाब ही बंद हो गया। इनके तत्काल भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। 
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बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि आधे मरीज डिहाइड्रेशन की परेशानी के हैं, इनमें रोजाना आठ से दस बच्चे भर्ती कर रहे हैं। यही हाल प्राइवेट डॉक्टरों के यहां है। बाल रोग विशेषज्ञों के यहां रोजाना आधे मरीजों में उल्टी-दस्त, पानी की कमी मिल रही है।  

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इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. अरुण जैन ने बताया कि एक साल से छोटे बच्चो में दो से तीन बार पानी जैसे दस्त हों तो सावधान हो जाएं। इनकी देरी से बच्चों में डायरिया गंभीर हो रहा है। 

यह हालत है तो जान का खतरा
- आंखों के नीचे गड्ढे पड़ने लगें। 
- पेशाब पीला और गाढ़ा आने लगे। 
- पेशाब की मात्रा कम होने लगे।
- होंठ सूखने लगें, मुंह सूखने लगे। 
- पेशाब बंद हो जाना।

यह करें: 
- दस्त होने पर बच्चों को ओआरएस का घोल जरूर पिलाएं। 
- शिकंजी में नमक मिलाकर बच्चों को पिलाएं। 
- नारियल पानी भी पिलाएं।
- छह माह तक के शिशु को स्तनपान ही कराएं।
- बाहर का खाना, चटपटा और तले भोजन से बचाएं। 
- बच्चों को बासी भोजन, कटे-गले फलों से बचाएं।
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