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दो कैबिनेट मंत्री वाले इस वीआईपी जिले से भाग रहे यूपी के अफसर, जानिए वजह

Fri, 21 Jul 2017 01:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 21 Jul 2017 01:33 PM IST
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officers of up government are denying for posting in mathura
श्रीकृष्‍ण जन्मस्‍थान
भगवान कृष्ण की नगरी। भाजपा सरकार में वीआईपी जिला। ऊर्जा मंत्री और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा का शहर। फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी का संसदीय क्षेत्र। और क्या चाहिए। लेकिन अफसर हैं कि मानते ही नहीं। वे मथुरा आने को तैयार ही नहीं हैं। ट्रांसफर हो गया, लेकिन ज्वाइन नहीं कर रहे।
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एसएसपी आए और छुट्टी पर चले गए। नगर आयुक्त ज्वाइन करने नहीं आ रहे। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और सचिव के लिए जिसका भी नाम चलता है, वही चुपके से कटवा ले रहा है। वजह जो भी हो लेकिन चर्चा है कि मथुरा में मंत्रियों के बढ़ते दबाव के कारण अफसर यहां आने को तैयार नहीं हैं।
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सरकार भले ही दावे कर रही हो कि मशीनरी पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है, लेकिन हकीकत एकदम उलट है। मंत्री और विधायक ही नहीं यहां तो माननीयों के रिश्तेदार भी अफसरों पर रूआब झाड़ते फिरते हैं। जरा जरा सी बात पर तबादले की धमकियां दी जाती हैं। अगर किसी ऐसे अधिकारी की तैनाती मथुरा में हो जाती है, जो माननीयों का चहेता नहीं होता तो उसे दो महीने का वक्त काटना भी मुश्किल हो जाता है। 
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एक अधिकारी ने शासन में यहां तक कह दिया कि उसका स्थानांतरण भले ही किसी भी विभाग में कर दीजिए, लेकिन उसे मथुरा नहीं जाना है। मथुरा-वृंदावन नगर निगम में नगर आयुक्त के पद पर उज्ज्वल कुमार की नियुक्ति 10 दिन पहले हो चुकी है, लेकिन अब तक चार्ज नहीं हुआ है।

एसएसपी नितिन तिवारी चार्ज लेकर छुट्टी पर चले गए हैं। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और सचिव के पद खाली पड़े हैं। उनसे पहले एसएसपी विनोद मिश्रा का कार्यकाल यहां सिर्फ 53 दिन का रहा है।

यहां तो मंत्रियों-विधायकों के घर वालों की सरकार

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netaji
यहां मंत्रियों-विधायकों के घर वालों की सरकार चल रही है। इन लोगों ने खुद को प्रतिनिधि तक लिखना शुरू कर दिया है। किसी का भाई काम देख रहा है तो किसी का बेटा। यही लोग अधिकारियों के आफिस में बैठे देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं फोन करके अफसरों से इस तरह बात करते हैं जैसे वही मंत्री और विधायक हों। कुछ अफसरों ने इसकी शिकायत शासन में भी कर दी है।
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