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यूपी सरकार को भाया एडीए का ये काम, अब प्रदेश भर में लागू होगा मॉडल
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 10 Jul 2017 08:40 PM IST
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आगरा विकास प्राधिकरण
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश सरकार विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को सरल बनाने की कसरत में जुटी है। मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को आनलाइन किया जा रहा है। इसके लिए आगरा विकास प्राधिकरण के माडल को सरकार ने सबसे बेहतर माना है और पूरे प्रदेश में इसी पैटर्न पर मानचित्र स्वीकृति किए जाएंगे।
आगरा विकास प्राधिकरण में प्रदेश में सबसे पहले 2013-14 में तत्कालीन मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद के कार्यकाल में आनलाइन मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी थी। इस प्रक्रिया के तहत विकास प्राधिकरण की योजनाओं के मानचित्र महज 72 घंटे के अंदर आवेदक को आनलाइन उपलब्ध करा दिए जाते हैं। आवेदन को प्राधिकरण के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं।
निजी बिल्डरों की कालोनी में यदि दस्तावेज पूरे होते है और मानचित्र के परीक्षण के बाद में किसी तरह की आपत्ति नहीं होती है तो वहां भी मानचित्र 72 घंटे के अंदर जारी कर दिया जाता है। यदि मानचित्र में कोई कमी होती है तो उस पर आपत्ति लगाकर वापस कर दिया जाता है।
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आपत्तियों के निस्तारण के बाद मानचित्र स्वीकृत किया जाता है। प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक आन लाइन मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया 300 मीटर तक आवासीय भूखंडों पर ही लागू होती है। अन्य प्रकरणों में मानचित्र की प्रक्रिया पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही अपनाई जाती है।
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आगरा विकास प्राधिकरण में प्रदेश में सबसे पहले 2013-14 में तत्कालीन मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद के कार्यकाल में आनलाइन मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी थी। इस प्रक्रिया के तहत विकास प्राधिकरण की योजनाओं के मानचित्र महज 72 घंटे के अंदर आवेदक को आनलाइन उपलब्ध करा दिए जाते हैं। आवेदन को प्राधिकरण के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं।
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निजी बिल्डरों की कालोनी में यदि दस्तावेज पूरे होते है और मानचित्र के परीक्षण के बाद में किसी तरह की आपत्ति नहीं होती है तो वहां भी मानचित्र 72 घंटे के अंदर जारी कर दिया जाता है। यदि मानचित्र में कोई कमी होती है तो उस पर आपत्ति लगाकर वापस कर दिया जाता है।
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आपत्तियों के निस्तारण के बाद मानचित्र स्वीकृत किया जाता है। प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक आन लाइन मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया 300 मीटर तक आवासीय भूखंडों पर ही लागू होती है। अन्य प्रकरणों में मानचित्र की प्रक्रिया पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही अपनाई जाती है।