दो झोलाछाप की दुकान सील, हास्पिटल को नोटिस
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आगरा के स्वास्थ्य विभाग ने यमुनापार में दो झोलाछाप की दुकान बंद कराई। ये पेट रोग विशेषज्ञ बनकर डाक्टरी कर रहे थे। वहीं गुडलाइफ हास्पिटल में छापामारा। यहां कोई डाक्टर नहीं मिला। नोटिस देकर मरीज के भर्ती करने पर रोक लगा दी है।
एसीएम प्रथम वंदिता श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने प्रकाश नगर स्थित मुकेश कुमार की दुकान पर छापा मारा। बोर्ड पर बंगाली क्लीनिक लिखा हुआ था। ये बवासीर, भगंदर रोग का विशेषज्ञ बताते हुए इलाज कर रहा था। यहां दो मरीज मिले दुकान के एक कोने में बायोमेडिकल वेस्ट भरा हुआ था।
इसके पास कोई चिकित्सकीय डिग्री नहीं थी, इंटरमीडिएट पास था। खुद को पेट रोग विशेषज्ञ बताकर इलाज करता था। पास में ही सत्यपाल नामक झोलाछाप इलाज करते हुए मिला। इसकी दुकान पर कोई बोर्ड नहीं लगा था। दो मरीज मिले, जो पेट में दर्द और एक बुखार का था। मरीजों से पता चला कि तीन खुराक के 30 रुपये और इंजेक्शन लगाने के बाद 50 रुपये फीस थी।
इससे चिकित्सकीय डिग्री मांगी तो दिखा नहीं पाया। शैक्षणिक योग्यता पूछी तो जवाब नहीं दिया। बताया कि अस्पताल में काम करने के बाद दुकान खोलकर इलाज करने लगा। एसीएमओ डा. अजय कपूर, अपंजीकृत अस्पताल के नोडल अधिकारी डा. नंदन सिंह, शिवकांत दीक्षित समेत प्रदूषण नियंत्रण और नगर निगम के सदस्य रहे।
मरीज की शिकायत पर डीएम की ओर से गठित टीम में एसीएम द्वितीय के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यमुनापार मंडी समिति के पास गुड लाइफ हास्पिटल में छापा मारा। यहां दो प्रसूताएं मिली, जिनका आपरेशन से प्रसव हुआ था। मौके पर कोई डाक्टर नहीं था। प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ भी नहीं था।
टीम ने मरीज की भर्ती करने पर रोक लगा दी है। ये सत्यप्रकाश सारस्वत के नाम से पंजीकरण था। दरअसल, टेढ़ी बगिया निवासी हीरालाल की पत्नी सूरजमुखी को गुड लाइफ हॉस्पिटल, मंडी समिति में 28 जुलाई को भर्ती कराया था।