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Agra: 56 लाख रुपये में बने 28 आइसोलेशन कोचों में जम गई धूल, आठ महीने से ताले ही नहीं खुले

Sat, 05 Dec 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 05 Dec 2020 12:02 AM IST
सार

  • अप्रैल में तैयार किए गए थे आइसोलेशन कोच, आठ महीने में एक भी मरीज नहीं किया गया भर्ती, खिड़कियों से पेंट हटा, जम गई धूल 

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Agra Isolation Train Coaches News: not a single patient admitted in the isolation train coaches in agra
आगरा: आइसोलेशन कोच - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए दो-दो लाख खर्च करके तैयार किए गए रेल के 28 कोचों में आठ माह में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। आलम यह है कि बेड पर धूल की मोटी परत जम गई है। अप्रैल से कैंट स्टेशन के यार्ड में खड़े इन कोचों की खिड़कियों का पेंट उखड़ गया है। जिस टेप से खिड़कियां बंद की गई, वह भी हट चुकी है। ताले तक नहीं खुले हैं। 

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अमर उजाला टीम ने गुरुवार को इन कोच का जायजा लिया तो यह हकीकत सामने आई। लॉकडाउन के दौरान रेलवे के कैरेज एंड वैगन विभाग ने इन कोचों को आइसोलेशन वार्ड में बदला था। बारिश में कोच का रंग उतर चुका है। सिर्फ आगरा ही नहीं, रेलवे बोर्ड ने देशभर में आपात स्थितियों से निपटने के लिए हर मंडल में ट्रेन के कोचों में आइसोलेशन कोच तैयार करवाए थे। 
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हर कोच में आठ बेड, आक्सीजन सिलिंडर

हर कोच में आठ बेड बनाए गए थे। एक कक्ष को मेडिकल टीम के लिए बनाया गया था। शौचालयों के डिजाइन में भी तब्दीली की गई थी। इसमें मरीज के लिए बेड के अलावा ड्रिप चढ़ाने और ऑक्सीजन सिलिंडर रखने के साथ ही अन्य सुविधाएं दी गईं। इन्हें अब तक खोलकर भी नहीं देखा गया है।

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भर्ती किए जा सकते हैं 224 मरीज

इन कोच का इस्तेमाल किया जाता तो इनमें 224 मरीज भर्ती किए जा सकते थे। आगरा में प्रशासन ने स्कूल, कॉलेजों में कोरोना मरीज भर्ती किए लेकिन कोचों का इस्तेमाल नहीं किया। कई जगह कॉलेजों में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में सुविधाएं न होने की शिकायत भी आई थी।

दलील: जब जरूरत होगी, तब उपलब्ध कराएंगे

आगरा रेल मंडल के वाणिज्य प्रबंधक एसके श्रीवास्वत ने बताया कि यह कोच आपात स्थिति के लिए तैयार किए गए थे। सिविल अथॉरिटी को जब जरूरत होगी, इन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल तो इनकी कहीं जरूरत नहीं पड़ी है। यह काम रेलवे बोर्ड के आदेश के मुताबिक किया गया था। 

कॉलेज से तो अच्छे ही थे कोच

रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य राजकुमार शर्मा ने कहा कि रेलवे ने यह कोच आपातकाल के लिए बनाए थे मगर इनका उपयोग आइसोलेशन वार्ड के रूप में अब भी किया जा सकता है। प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का उपचार बहुत महंगा है। जो लोग आइसोलेशन कोच में भर्ती होना चाहें, उन्हें यह सुविधा दी जानी चाहिए।

सस्ता इलाज मुहैया करा सकता है रेलवे

रेल परामर्शदात्री समिति के पूर्व सदस्य मुकेश वर्मा ने कहा कि आइसोलेशन कोचों का उपयोग वार्ड के रूप में किया जा सकता है। इन कोचों में सुविधाएं बढ़ाकर रेलवे भी सस्ता इलाज मुहैया करा सकता है क्योंकि रेलवे के पास भी चिकित्सकीय सुविधाएं और स्टाफ है। 
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