आगरा: 17 महीने में एक भी कोरोना संक्रमित को 'आयुष्मान योजना' के तहत नहीं मिला इलाज
आगरा में आयुष्मान योजना के सह प्रभारी डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि सितंबर, 2018 से शुरू हुई योजना में तीन साल में 14,517 मरीजों को इलाज मिला है। इसमें प्रसव, ऑपरेशन, कैंसर, किडनी, लिवर जैसी बीमारियों के लाभार्थी हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में कोरोना काल के 17 महीनों में आयुष्मान कार्ड योजना से कोरोना से संक्रमित एक भी मरीज को इलाज नहीं मिला। इस दौरान चार अस्पताल योजना से अलग हो गए। नॉन कोविड मरीजों को योजना का लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के नोडल प्रभारी डॉ. सुकेश गुप्ता ने बताया कि बीते साल मार्च से 31 अगस्त तक 5,902 मरीजों को इलाज मिला। इनमें से कोई कोराना संक्रमित मरीज नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान चंद्रा डायग्नोसिस सेंटर, पाठक हॉस्पिटल, खंडेलवाल नर्सिंग होम और कमलेश टंडन नर्सिंग होम ने योजना से हटने के लिए विभाग को पत्र लिखा है। इससे पहले रेनबो हॉस्पिटल, सिनर्जी प्लस, आगरा कार्डिएक सेंटर, सफायर हॉस्पिटल और पुष्पांजलि हॉस्पिटल भी योजना छोड़ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि हालांकि योजना में शामिल अधिकांश अस्पताल कोविड सेंटर नहीं बनाए गए थे। सरकारी अस्पतालों में पहले से ही कोरोना संक्रमित का निशुल्क इलाज हो रहा था।
तीन साल में 14,517 मरीजों को मिला इलाज
योजना के सह प्रभारी डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि सितंबर, 2018 से शुरू हुई योजना में तीन साल में 14,517 मरीजों को इलाज मिला है। इसमें प्रसव, ऑपरेशन, कैंसर, किडनी, लिवर जैसी बीमारियों के लाभार्थी हैं। जिले में करीब आठ लाख के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने हैं। 1.85 लाख लोगों के कार्ड बन गए हैं। तेजी से कार्ड बनाने का कार्य चल रहा है।
इन अस्पतालों ने योजना में किया आवेदन
आयुष्मान योजना के डाटा ऑपरेटर गौरव खंडेलवाल ने बताया कि विम्स हॉस्पिटल, अग्रवाल हॉस्पिटल, अल्का सेन हॉस्पिटल, संगीताराम लवानियां हॉस्पिटल और प्रियांशु हॉस्पिटल ने योजना के लिए आवेदन किया है। अभी 33 निजी अस्पताल और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और महिला चिकित्सालय में मरीजों को योजना का लाभ मिल रहा है।