स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत: ओडीएफ घोषित हो चुके आगरा के 15 हजार घरों में नहीं है शौचालय
तीन साल पहले 2 अक्तूबर 2018 को कागजों में आगरा को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। जबकि हकीकत यह है कि आठ गांवों में सामुदायिक व करीब 15 हजार घरों में निजी शौचालय नहीं है।
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आगरा करीब तीन साल पहले खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित हा चुकी है, लेकिन यह सिर्फ कागजों में ही है। शहर से गांव तक काफी लोग खुले शौच कर रहे हैं। आठ गांव ऐसे हैं, जहां सामुदायिक शौचालय नहीं हैं। इनके अलावा जिले में करीब 15 हजार घरों में निजी शौचालय नहीं हैं। इस साल छह हजार शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है, जबकि 10 हजार से अधिक लोगों ने इसके लिए आवेदन किए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया। 2 अक्तूबर 2018 को तत्कालीन डीएम गौरव दयाल ने जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया। जिला पंचायत राज विभाग तीन लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालय निर्माण का दावा कर रही है, जबकि धरातल पर हकीकत जुदा है।
मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने बताया कि पंचायत राज मद से निजी व सामुदायिक शौचालय बनवाए जा रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी नीतेश भोसले ने बताया कि जुलाई 2021 में छह हजार शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला है। पिछले साल भी छह हजार ही नए शौचालय बने हैं।
690 ग्राम पंचायतों में महज आठ पंचायत ऐसी हैं जहां सामुदायिक शौचालय नहीं बने। इन्हें 30 अगस्त तक बनाना है। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि जब जिला ओडीएफ घोषित हो चुका है तो फिर शौचालय के लिए 10 हजार से अधिक आवेदन कैसे लंबित हैं।
पंचकुइयां श्रमिक बस्ती में शौचालय नहीं
पंचकुइयां स्थित जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बराबर से श्रमिक बस्ती में 40 से अधिक परिवार रहते हैं। घरों में और सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग सभी खुले में शौच को मजबूर हैं।
दो साल में भी नहीं मिली दूसरी किस्त
ककुआ निवासी रतन सिंह भूमिहार किसान है। सितंबर 2019 में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया। पहली किश्त मिल गई। दो साल से छह हजार रुपये की दूसरी किस्त नहीं मिली। निजी खर्च से शौचालय का निर्माण कराया।
जगनेर में हो चुका है घोटाला
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जगनेर में शौचालय निर्माण में घोटाला हो चुका है। 2017 में तत्कालीन ग्राम प्रधान ने 600 से अधिक शौचालय कागजों में बना दिए। विकास भवन से करीब 2 करोड़ रुपये प्राप्त कर लिए। शौचालय का सत्यापन करने जब टीम पहुंची तो गांव में सिर्फ गड्ढे मिले। डीएम एनजी रवि कुमार ने 2019 में आरोपित ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार खत्म कर दिए। सरकारी धनराशि की वसूली की प्रक्रिया चल रही है।
फतेहाबाद में जर्जर हो गए हैं बंद पड़े शौचालय
फतेहाबाद ब्लॉक की 70 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब एक वर्ष पूर्व बनाए गए अधिकांश शौचालयों के ताले नहीं खुल सके हैं। बंद पड़े शौचालय जर्जर होने लगे हैं। फतेहाबाद देहात में बने शौचालय का चबूतरा गिर चुका है। मामले में खंड विकास अधिकारी मंगल यादव का कहना है कि शौचालय जल्द दुरुस्त कराकर खुलवाए जाएंगे।
शमसाबाद में ढाई सौ परिवारों में 100 शौचालय
ग्राम पंचायत शेखुपुर धमेना के ग्राम झारपुरा में 250 परिवार रहते हैं। करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में महज सौ शौचालय ही बने हैं। करीब 150 परिवार के लोग अब भी खुले में ही शौच के लिए जाते हैं। गांव के मानिक चंद ने बताया कि शौचालय बनवाने के लिए अधिकारियों व ग्राम प्रधान के चक्कर काटे। लेकिन शौचालय नहीं बना।
सीकरी में खुले में शौच के लिए जाते हैं सौ परिवार
फतेहपुर सीकरी ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम महदऊ कहने को तो खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) है, लेकिन अब भी यहां के करीब सौ परिवारों के पास शौचालय नहीं है। गांव में कुल 750 परिवार हैं। जहां लगभग 4500 लोग रहते हैं। गांव का सामुदायिक शौचालय भी अधूरा पड़ा है। प्रधान तालेवर सिंह ने बताया कि पानी की समस्या के कारण कुछ ग्रामीण शौचालयों का उपयोग नहीं करते हैं।
राज्य सरकार दे रही 12 हजार रुपये का अनुदान
शौचालय निर्माण के लिए राज्य सरकार 12 हजार रुपये का अनुदान दे रही है। छह-छह हजार रुपये की दो किश्त हैं। डीपीआरओ नीतेश भोसले ने बताया कि पहली किश्त शौचालय का गड्डा खोदने व दीवारें बनाने पर मिलती है जबकि दूसरी शौचालय का उपयोग शुरू करने पर। दूसरी तरफ जनप्रहरी संस्था सचिव नरोत्तम शर्मा का कहना है कि जिले में 15 हजार से अधिक लोगों को शौचालय निर्माण के लिए दूसरी किश्त नहीं मिली।