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यमुना पर रबर चेकडैम की निकली ‘हवा’
अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 20 Apr 2016 01:39 AM IST
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यमुना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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जल संकट से जूझते शहरवासियों के लिए एक और बुरी खबर है। दम तोड़ती यमुना का जलस्तर सुधारने के लिए कई महीनों से चल रही कवायद पर पानी फिर गया है। शासन ने बजट के अभाव में नदी पर रबर चेकडैम के प्रस्ताव को रोक दिया है। भूमिगत पानी का स्तर पहले ही गिरता जा रहा है। नदी में पानी नहीं रहा तो हाहाकार मच जाएगा।
बता दें कि शहर का जल संकट दूर करने के लिए सिंचाई विभाग ने यमुना पर रबर के दो चेकडैम बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसका अनुमानित बजट 593 करोड़ रुपये रखा था। परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए सिंचाई विभाग ने शासन को यह बजट स्वीकृति के लिए भेजा था। इस पर प्रदेश सरकार एशियाई बैंक से फंडिंग की व्यवस्था में जुटी थी। मगर, सरकार के ये प्रयास रंग नहीं ला पाए हैं। ऐसे में बजट की व्यवस्था न हो पाने पर इस प्रस्ताव को शासन ने ठंडे बस्ते में टाल दिया है। पिछले दिनों मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने एक बैठक के दौरान जलकल विभाग के अधिकारियों को शासन के इस फैसले से अवगत भी करा दिया है। ताकि गर्मी में वे रॉ वाटर के अभाव में शहर में जल संकट की स्थिति न आने दें।
गौरतलब है कि जल संग्रह कर पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए यमुना पर चार मीटर ऊंचाई वाले दो रबर डैम बनाए जाने थे। एक सिकंदरा के पास और दूसरा ताजमहल से आगे। ताकि शहर में पानी की सप्लाई के लिए नदी पर निर्भर जल संस्थान को भरपूर पानी उपलब्ध हो सके।
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चेकडैम के लिए विदेशों के दौरे तक
यमुना पर रबर चेकडैम बनाने के लिए प्रमुख सचिव सहित कुछ स्थानीय अधिकारियों ने कई देशों के दौरे किए थे। वहां की नदियों पर बने रबर के चेकडैम देखने के गए। इसमें से चीन और साउथ कोरिया में नदी पर बने रबर चेकडैम की डिजाइन और तकनीक फाइनल की गई थी। इसी में से एक देश की तकनीक के आधार पर कालिंदी पर रबर के चेकडैम विकसित किए जाने थे।
नदी में सिल्ट ज्यादा
बता दें कि गोकुल बैराज से बमुश्किल एक हजार क्यूसिक पानी हर रोज छोड़ा जाता है। यमुना के लिए पानी की यह इतनी कम मात्रा है कि शहर तक पहुंचते-पहुंचते ही यह काफी कम रह जाता है। यही वजह है कि कैलाश घाट से ताजमहल से आगे तक कालिंदी सिल्ट की नदी के रूप में सिमट कर रह गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जल संस्थान को भी शोधन के लिए कभी-कभी पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। इसमें इतनी सिल्ट है कि इसका शोधन करने में काफी मुश्किल आती है।
रबर चेकडैम के लिए बजट की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके चलते शासन ने इस प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया है। एशियाई बैंक से फंडिंग की व्यवस्था की जा रही थी।
विनय कुमार राठी, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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बता दें कि शहर का जल संकट दूर करने के लिए सिंचाई विभाग ने यमुना पर रबर के दो चेकडैम बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसका अनुमानित बजट 593 करोड़ रुपये रखा था। परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए सिंचाई विभाग ने शासन को यह बजट स्वीकृति के लिए भेजा था। इस पर प्रदेश सरकार एशियाई बैंक से फंडिंग की व्यवस्था में जुटी थी। मगर, सरकार के ये प्रयास रंग नहीं ला पाए हैं। ऐसे में बजट की व्यवस्था न हो पाने पर इस प्रस्ताव को शासन ने ठंडे बस्ते में टाल दिया है। पिछले दिनों मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने एक बैठक के दौरान जलकल विभाग के अधिकारियों को शासन के इस फैसले से अवगत भी करा दिया है। ताकि गर्मी में वे रॉ वाटर के अभाव में शहर में जल संकट की स्थिति न आने दें।
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गौरतलब है कि जल संग्रह कर पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए यमुना पर चार मीटर ऊंचाई वाले दो रबर डैम बनाए जाने थे। एक सिकंदरा के पास और दूसरा ताजमहल से आगे। ताकि शहर में पानी की सप्लाई के लिए नदी पर निर्भर जल संस्थान को भरपूर पानी उपलब्ध हो सके।
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चेकडैम के लिए विदेशों के दौरे तक
यमुना पर रबर चेकडैम बनाने के लिए प्रमुख सचिव सहित कुछ स्थानीय अधिकारियों ने कई देशों के दौरे किए थे। वहां की नदियों पर बने रबर के चेकडैम देखने के गए। इसमें से चीन और साउथ कोरिया में नदी पर बने रबर चेकडैम की डिजाइन और तकनीक फाइनल की गई थी। इसी में से एक देश की तकनीक के आधार पर कालिंदी पर रबर के चेकडैम विकसित किए जाने थे।
नदी में सिल्ट ज्यादा
बता दें कि गोकुल बैराज से बमुश्किल एक हजार क्यूसिक पानी हर रोज छोड़ा जाता है। यमुना के लिए पानी की यह इतनी कम मात्रा है कि शहर तक पहुंचते-पहुंचते ही यह काफी कम रह जाता है। यही वजह है कि कैलाश घाट से ताजमहल से आगे तक कालिंदी सिल्ट की नदी के रूप में सिमट कर रह गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जल संस्थान को भी शोधन के लिए कभी-कभी पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। इसमें इतनी सिल्ट है कि इसका शोधन करने में काफी मुश्किल आती है।
रबर चेकडैम के लिए बजट की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके चलते शासन ने इस प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया है। एशियाई बैंक से फंडिंग की व्यवस्था की जा रही थी।
विनय कुमार राठी, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग