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एनएलयू आगरा में बनाएं, देश भर से छात्र पढ़ने आएं
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आगरा। उत्तर भारत का पहला विधि स्नातक आगरा कॉलेज ने दिया है। शिक्षाविदों के मुताबिक आगरा कॉलेज में वर्ष 1860 से विधि की पढ़ाई कराई जा रही है। इसलिए पहले आगरा में हाईकोर्ट बना था। आगरा के शिक्षाविद् और न्यायविदों ने मांग उठाई है कि आगरा में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) बने। जिससे प्रतिभा का पलायन न हो। सांसद एसपी सिंह बघेल के केंद्रीय कानून राज्यमंत्री बनने से और भी उम्मीद बढ़ गई है। विभिन्न संगठनों की ओर से इस संबंध में मांग भी रखी जा रही है। नेशनल चैंबर की ओर से भी इस दिशा में प्रयास किया गया है।
नेशनल चैंबर के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि आगरा में एनएलयू स्थापित किए जाने के लिए उन्होंने कानून एवं न्याय मंत्रालय को जुलाई में पत्र भेजा था। जिस पर अक्तूबर में मंत्रालय की सहायक विधि सलाहकार सविता सिंघल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को कार्यवाही के लिए लिखा है। उनका कहना है कि आगरावासियों के लिए गौरव की बात यह है कि सांसद एसपी सिंह बघेल के पास केंद्रीय कानून राज्यमंत्री का दायित्व है। उनका प्रयास रंग लाएगा।
आगरा से प्रतिभा का पलायन तेजी से हो रहा है। इसको रोका जाना जरूरी है।
नए उद्योगों पर रोक और अन्य सुविधा न होने से युवा यहां काम करने के इच्छुक नहीं हैं।
देश भर के छात्र यहां पढ़ने के लिए आएंगे तो निश्चित रूप से प्रतिभाओं का पलायन रुकेगा।
यहां लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित होने विधि पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों का रुझान बढ़ेगा।
आगरा कॉलेज के विधि संकाय ने उत्तर भारत में विधि की शिक्षा सबसे शुरू की। इस लिहाज से एनएलयू आगरा का अधिकार भी है। आगरा को हाईकोर्ट बैंच और एनएलयू दोनों चाहिए। इसके लिए मजबूत राजनैतिक इच्छा शक्ति की जरूरत है। - डॉ. जीसी सक्सेना, पूर्व कुलपति, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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कानून की पढ़ाई के उच्चतर स्तर के लिए एनएलयू की मांग उचित है। एडवांस्ड पढ़ाई के लिए एनएलयू जरूरी है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छलेसर परिसर में एनएलयू को स्थापित किया जा सकता है। यहां पढ़ने के लिए देश भर के छात्र आएंगे।’ - डॉ. विनोद कुमार माहेश्वरी, पूर्व प्राचार्य, आगरा कॉलेज
देश में इस समय 23 एनएलयू है। प्रदेश में अकेले लखनऊ में स्थापित है। आगरा में भी यूनिवर्सिटी स्थापित की जा सकती है। केंद्रीय कानून राज्यमंत्री इसके लिए प्रयास करें तो बात बन सकती है। इसके लिए पहले मुख्यमंत्री से बात करनी होगी। इसके लिए एक्सप्रेसवे के पास, फतेहाबाद रोड या फिर ग्वालियर रोड पर जमीन तलाशी जा सकती है। - डॉ. अरविंद मिश्रा, समन्वयक विधि विभाग, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से करीब 1100 कॉलेज संबद्ध हैं। इनमें से महज 34 कॉलेजों में ही विधि पाठ्यक्रम संचालित है। जबकि एलएलएम महज दो कॉलेजों में ही संचालित है। बाकी पाठ्यक्रमों की अपेक्षा विधि पाठ्यक्रमों में छात्रों का रुझान कम बढ़ रहा है। प्रवेश समिति के सह समन्वयक प्रो. मनु प्रताप सिंह के मुताबिक एलएलएम पाठ्यक्रम महज दो कॉलेजों में संचालित है। इसमें भी डीएस कॉलेज, अलीगढ़ में इसी वर्ष से एलएलएम शुरू हुआ है। इससे पहले आगरा कॉलेज में ही यह पाठ्यक्रम संचालित था। आगरा कॉलेज में 60 व डीएस कॉलेज अलीगढ़ में 20 सीटें हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
- 27 कॉलेजों (डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि से संबद्ध) में एलएलबी पाठ्यक्रम संचालित है।
- 04 कॉलेजो- आगरा कॉलेज, आगरा, डीएस कॉलेज व वार्ष्णेय कॉलेज, अलीगढ़ व बीएसए कॉलेज, मथुरा में पाठ्यक्रम सहायता प्राप्त है।
- 23 कॉलेजों में एलएलबी का पाठ्यक्रम स्ववित्तपोषित व्यवस्था के अंतर्गत संचालित है।
- 4600 सीटें एलएलबी में हैं।
- 17 कॉलेजों में बीएएलएलबी पाठ्यक्रम संचालित है।
- 01 कॉलेज (डीएस कॉलेज), अलीगढ़ को छोड़कर सभी में स्ववित्तपोषित व्यवस्था के तहत पाठ्यक्रम संचालित हैं।
- 2283 सीटें बीएएलएलबी में हैं।
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नेशनल चैंबर के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि आगरा में एनएलयू स्थापित किए जाने के लिए उन्होंने कानून एवं न्याय मंत्रालय को जुलाई में पत्र भेजा था। जिस पर अक्तूबर में मंत्रालय की सहायक विधि सलाहकार सविता सिंघल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को कार्यवाही के लिए लिखा है। उनका कहना है कि आगरावासियों के लिए गौरव की बात यह है कि सांसद एसपी सिंह बघेल के पास केंद्रीय कानून राज्यमंत्री का दायित्व है। उनका प्रयास रंग लाएगा।
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आगरा से प्रतिभा का पलायन तेजी से हो रहा है। इसको रोका जाना जरूरी है।
नए उद्योगों पर रोक और अन्य सुविधा न होने से युवा यहां काम करने के इच्छुक नहीं हैं।
देश भर के छात्र यहां पढ़ने के लिए आएंगे तो निश्चित रूप से प्रतिभाओं का पलायन रुकेगा।
यहां लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित होने विधि पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों का रुझान बढ़ेगा।
आगरा कॉलेज के विधि संकाय ने उत्तर भारत में विधि की शिक्षा सबसे शुरू की। इस लिहाज से एनएलयू आगरा का अधिकार भी है। आगरा को हाईकोर्ट बैंच और एनएलयू दोनों चाहिए। इसके लिए मजबूत राजनैतिक इच्छा शक्ति की जरूरत है। - डॉ. जीसी सक्सेना, पूर्व कुलपति, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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कानून की पढ़ाई के उच्चतर स्तर के लिए एनएलयू की मांग उचित है। एडवांस्ड पढ़ाई के लिए एनएलयू जरूरी है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छलेसर परिसर में एनएलयू को स्थापित किया जा सकता है। यहां पढ़ने के लिए देश भर के छात्र आएंगे।’ - डॉ. विनोद कुमार माहेश्वरी, पूर्व प्राचार्य, आगरा कॉलेज
देश में इस समय 23 एनएलयू है। प्रदेश में अकेले लखनऊ में स्थापित है। आगरा में भी यूनिवर्सिटी स्थापित की जा सकती है। केंद्रीय कानून राज्यमंत्री इसके लिए प्रयास करें तो बात बन सकती है। इसके लिए पहले मुख्यमंत्री से बात करनी होगी। इसके लिए एक्सप्रेसवे के पास, फतेहाबाद रोड या फिर ग्वालियर रोड पर जमीन तलाशी जा सकती है। - डॉ. अरविंद मिश्रा, समन्वयक विधि विभाग, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से करीब 1100 कॉलेज संबद्ध हैं। इनमें से महज 34 कॉलेजों में ही विधि पाठ्यक्रम संचालित है। जबकि एलएलएम महज दो कॉलेजों में ही संचालित है। बाकी पाठ्यक्रमों की अपेक्षा विधि पाठ्यक्रमों में छात्रों का रुझान कम बढ़ रहा है। प्रवेश समिति के सह समन्वयक प्रो. मनु प्रताप सिंह के मुताबिक एलएलएम पाठ्यक्रम महज दो कॉलेजों में संचालित है। इसमें भी डीएस कॉलेज, अलीगढ़ में इसी वर्ष से एलएलएम शुरू हुआ है। इससे पहले आगरा कॉलेज में ही यह पाठ्यक्रम संचालित था। आगरा कॉलेज में 60 व डीएस कॉलेज अलीगढ़ में 20 सीटें हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
- 27 कॉलेजों (डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि से संबद्ध) में एलएलबी पाठ्यक्रम संचालित है।
- 04 कॉलेजो- आगरा कॉलेज, आगरा, डीएस कॉलेज व वार्ष्णेय कॉलेज, अलीगढ़ व बीएसए कॉलेज, मथुरा में पाठ्यक्रम सहायता प्राप्त है।
- 23 कॉलेजों में एलएलबी का पाठ्यक्रम स्ववित्तपोषित व्यवस्था के अंतर्गत संचालित है।
- 4600 सीटें एलएलबी में हैं।
- 17 कॉलेजों में बीएएलएलबी पाठ्यक्रम संचालित है।
- 01 कॉलेज (डीएस कॉलेज), अलीगढ़ को छोड़कर सभी में स्ववित्तपोषित व्यवस्था के तहत पाठ्यक्रम संचालित हैं।
- 2283 सीटें बीएएलएलबी में हैं।