टूंडला। निषाद वंश में ऐसे भी वीर पुरुष हुए हैं, जिन्होंने गुरु के कहने पर अंगूठा तक दान में दे दिया। यह बात कोट कसौंदी स्थित सीयर देवी मंदिर परिसर में वीर एकलव्य की प्रतिमा का अनावरण करते हुए पूर्व विधायक छोटेलाल वर्मा ने कहीं।
उन्होंने कहा कि एकलव्य बचपन में धनुर्विद्या सीखने के उद्देश्य से द्रोणाचार्य के आश्रम में आए, लेकिन निषादपुत्र होने के कारण द्रोणाचार्य ने उन्हें अपना शिष्य बनाना स्वीकार नहीं किया। एक दिन पांडव तथा कौरव गुरु द्रोण के साथ आखेट के लिए उसी वन में गए जहां पर एकलव्य आश्रम बना कर धनुर्विद्या का अभ्यास कर रहा था। उन्होंने देखा एकलव्य ने भोंकते हुए कुत्ते के मुख को वाणों से भर दिया।
उसने द्रोणाचार्य की मिट्टी की मूर्ति बना कर अभ्यास किया। लेकिन गुरु ने दक्षिणा में उसके दाहिने हाथ का अंगूठा मांग लिया। इस मौके पर मुकेश वर्मा, मंदिर महंत बाबा हेतदास, समाजसेवी कप्तान सिंह, सरपंच योगेश उपाध्याय, वेदसिंह, गीतम सिंह, देवकरन दिलावर, रामखिलाड़ी प्रधान, सुरेश शास्त्री, रविशंकर, रोमन सिंह, लज्जाराम लालता प्रसाद, लक्ष्मीनारायन, लालता प्रसाद, शंभू दयाल, डॉ ओसपाल, हिम्मत सिंह आदि उपस्थित रहे।