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निर्जला एकादशी : आज रवि, शिव और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग, तीर्थ में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़, वर्षभर के व्रतों का पुण्य कमाएंगे श्रद्धालु
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बटेश्वर। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस बार यह पर्व रवि, शिव और सिद्ध योग के अत्यंत दुर्लभ संयोग में आया है। ज्योतिषविदों के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर बृहस्पतिवार रात 8:10 बजे तक रहेगी। इस दिन व्रत रखने से 24 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होगा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर बिना जल ग्रहण किए यह अत्यंत कठिन व्रत रखा था, इसलिए इसे भीम एकादशी भी कहा जाता है। सनातन धर्म में वैसे तो वर्ष की सभी 24 एकादशियों का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास की इस निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा, दान, जप और श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर बिना जल ग्रहण किए यह अत्यंत कठिन व्रत रखा था, इसलिए इसे भीम एकादशी भी कहा जाता है। सनातन धर्म में वैसे तो वर्ष की सभी 24 एकादशियों का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास की इस निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा, दान, जप और श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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