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जिले के बच्चे आ रहे निमोनिया की चपेट में, 23 दिन में 20 की मौत
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23एमएनपी-14-जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में मरीजों की जांच करते डॉक्टर
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। सर्दी बढ़ने के साथ ही निमोनिया के रोगी भी बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड के अनुसार 23 दिन में निमोनिया से पीड़ित 20 बच्चों की मौत हुई है। तीन बच्चों की मौत उपचार के दौरान हुई, जबकि 17 बच्चे निजी डॉक्टर के यहां से उपचार के बाद जिला अस्पताल में मृत अवस्था में पहुंचे थे। 23 दिन में जिला अस्पताल में निमोनिया के 157 मरीज भर्ती कराए गए हैं।
दिसंबर की शुरुआत के साथ ही जिले में सर्दी बढ़ी है। तापमान में कमी और सर्द हवाओं के चलने से सर्दी जुकाम के साथ ही निमोनिया के मरीज बढ़े हैं। जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड के अनुसार एक से 23 दिसंबर तक 2070 बच्चे उपचार के लिए पहुंचे। इनमें से 14 सौ बच्चे सर्दी-जुकाम, निमोनिया और बुखार से पीड़ित थे। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दर्ज रिकार्ड के अनुसार इस महीने अब तक इमरजेंसी और वार्ड में पहुंचे 60 मरीजों की मौत हुई। इनमें 20 बच्चे शामिल थे।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके शाक्य बताते हैं कि बच्चों की मौत लापरवाही से हो रही है। पहले लोग झोलाछाप से उपचार कराते रहते हैं। जब हालत बिगड़ती है तो जिला अस्पताल लेकर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपचार के दौरान मात्र तीन बच्चों की मौत हुई है, जबकि 17 बच्चे मृत अवस्था में ही लाए गए। इसका पहले किसी प्राइवेट या फिर झोलाछाप के यहां इलाज हुआ।
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दिसंबर की शुरुआत के साथ ही जिले में सर्दी बढ़ी है। तापमान में कमी और सर्द हवाओं के चलने से सर्दी जुकाम के साथ ही निमोनिया के मरीज बढ़े हैं। जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड के अनुसार एक से 23 दिसंबर तक 2070 बच्चे उपचार के लिए पहुंचे। इनमें से 14 सौ बच्चे सर्दी-जुकाम, निमोनिया और बुखार से पीड़ित थे। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दर्ज रिकार्ड के अनुसार इस महीने अब तक इमरजेंसी और वार्ड में पहुंचे 60 मरीजों की मौत हुई। इनमें 20 बच्चे शामिल थे।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके शाक्य बताते हैं कि बच्चों की मौत लापरवाही से हो रही है। पहले लोग झोलाछाप से उपचार कराते रहते हैं। जब हालत बिगड़ती है तो जिला अस्पताल लेकर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपचार के दौरान मात्र तीन बच्चों की मौत हुई है, जबकि 17 बच्चे मृत अवस्था में ही लाए गए। इसका पहले किसी प्राइवेट या फिर झोलाछाप के यहां इलाज हुआ।
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