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शिशु सदन में मासूम बेटी ने तोड़ा दम, अस्पताल के बाथरूम में छोड़ गई थी मां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 29 Nov 2018 01:09 PM IST
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पहले मां ने ठुकराया, फिर बीमारी ने घेर लिया। किस्मत की मारी बिटिया ने बुधवार को दम तोड़ दिया। दिल झकझोर देने वाला यह मामला आगरा में सामने आया है। नवजात 21 अगस्त को नोएडा के ईएसआई अस्पताल के बाथरूम में मिली थी।
माना जा रहा था कि नवजात की मां उसे छोड़ गई। चाइल्ड लाइन को पता चला तो उसे वहीं पर रख लिया। कुछ दिन बाद आगरा के राजकीय बाल गृह (शिशु सदन) में भेज दिया। यहां बीमारी से उसकी मौत हो गई।
बच्ची को सेप्टीसीमिया था। तबीयत बिगड़ती जा रही थी। शिशु सदन के स्टाफ ने 15 नवंबर को एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया। तबीयत में सुधार हो गया। 19 नवंबर को फिर से शिशु सदन ले जाया गया। तबीयत फिर से बिगड़ी।
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इस बार उसे भर्ती कराने का मौका भी नहीं मिला। बच्ची ने बुधवार को दम तोड़ दिया। शिशु सदन में मायूसी छा गई। सब यही कह रहे हैं कि पहले मां ने हाथ छोड़ा और अब जिंदगी ने साथ छोड़ दिया।
11 महीने में मिल चुकीं 19 बेटियां
ताजनगरी में इस साल 11 महीने में 19 नवजात शिशु मिल चुके हैं। कहीं नदी के किनारे तो कहीं कूड़े के ढेर पर। सभी बेटियां थीं। कोई बच पाई तो किसी की जिंदगी दो दिन की ही रही। कुछ खुशकिस्मत रहीं कि उन्हें बचा लिया गया। दो महीने पहले एक बच्ची को तो सिपाही ने बचाया था। वह सड़क किनारे मिली थी। सिपाही ने उसे एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था।
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माना जा रहा था कि नवजात की मां उसे छोड़ गई। चाइल्ड लाइन को पता चला तो उसे वहीं पर रख लिया। कुछ दिन बाद आगरा के राजकीय बाल गृह (शिशु सदन) में भेज दिया। यहां बीमारी से उसकी मौत हो गई।
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बच्ची को सेप्टीसीमिया था। तबीयत बिगड़ती जा रही थी। शिशु सदन के स्टाफ ने 15 नवंबर को एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया। तबीयत में सुधार हो गया। 19 नवंबर को फिर से शिशु सदन ले जाया गया। तबीयत फिर से बिगड़ी।
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इस बार उसे भर्ती कराने का मौका भी नहीं मिला। बच्ची ने बुधवार को दम तोड़ दिया। शिशु सदन में मायूसी छा गई। सब यही कह रहे हैं कि पहले मां ने हाथ छोड़ा और अब जिंदगी ने साथ छोड़ दिया।
11 महीने में मिल चुकीं 19 बेटियां
ताजनगरी में इस साल 11 महीने में 19 नवजात शिशु मिल चुके हैं। कहीं नदी के किनारे तो कहीं कूड़े के ढेर पर। सभी बेटियां थीं। कोई बच पाई तो किसी की जिंदगी दो दिन की ही रही। कुछ खुशकिस्मत रहीं कि उन्हें बचा लिया गया। दो महीने पहले एक बच्ची को तो सिपाही ने बचाया था। वह सड़क किनारे मिली थी। सिपाही ने उसे एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था।