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सरकारी मेडिकल कॉलेज में नवजात को लेकर दादी ने तीन विभागों के लगाए चक्कर, नहीं मिला इलाज
Sat, 07 Nov 2020 11:15 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 07 Nov 2020 11:15 AM IST
सार
- आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था सुधर नहीं रही है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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माया के गोद में पोता, असगर अली और उनकी पत्नी बीमार बच्ची के साथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में अगले दिन की ओपीडी वाले मरीजों को शुक्रवार को भी निराश होकर लौटना पड़ा। इनमें से ही एक खेरागढ़ की माया ने एक दिन की नवजात धेवती को गोद में लेकर तीन घंटे में तीन विभागों के चक्कर काटे, लेकिन इलाज नहीं मिला। निराश होकर वह लौट गईं। सिर्फ माया नहीं, और भी कई मरीजों को उपचार नहीं मिल पाया। इनके मर्ज के चिकित्सकों की ओपीडी का नंबर ही नहीं था।
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खेरागढ़ की माया ने बताया कि धेवती के पीठ पर फोड़ा है। इमरजेंसी दिखाने ले गए तो नई इमारत बाल रोग भेज दिया। वहां बताया कि सर्जरी विभाग का मामला है ओपीडी चले जाओ। यहां आईं तो बताया कि सर्जरी की ओपीडी शनिवार को है, इमरजेंसी लेकर चले जाओ, वहां भी बाद में आने को कह दिया। नौ बजे से 12 बजे तक बच्ची को लेकर भटकती रही पर उपचार नहीं मिला।
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'मिर्गी का दौरा पड़ा...चिकित्सक नहीं मिला'
फिरोजाबाद के असगर अली अपनी बच्ची को लेकर ओपीडी आए। बेटी को मिर्गी का दौरा पड़ा था। पर्चा बनाने को कहा तो कहा गया कि इसकी हालत खराब है, इमरजेंसी लेकर चले जाओ। असगर ने कहा कि तब तक कोई दवा लिख दो, बताया कि डॉक्टर ही नहीं बैठे हैं। काफी देर तक सुनवाई नहीं हुई तो बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कर दिया।
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परेशानी सिर्फ बिना पंजीकरण वाले मरीजों को : प्राचार्य
ओपीडी के बाहर खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
एसएन के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि जो लोग पंजीकरण कराकर आ रहे हैं, उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही है। दरअसल, ओपीडी में अलग-अलग मर्ज के चिकित्सक अलग-अलग दिन बैठ रहे हैं। अगर कोई मरीज उस चिकित्सक को दिखाना चाहे, जिसका ओपीडी का नंबर ही नहीं है, तो उसे परेशानी हो रही है।
अगर चिकित्सक की ओपीडी ड्यूटी है, तो मरीज का पंजीकरण न होने पर भी व्यवस्था कराई जा रही है। इनका पंजीकरण मौके पर कराया जा रहा है। मरीजों को चाहिए कि वह पंजीकरण पहले कराएं और यह देख लें कि उनके चिकित्सक का नंबर किस दिन है। अगर मरीज की हालत गंभीर है तो उसे इमरजेंसी में उपचार दिया जाता है।
हड्डी रोग की इमरजेंसी में लगेगी ओपीडी
हड्डी रोग विभाग की ओपीडी अब इमरजेंसी में लगाई जाएगी। अभी तक यह ओपीडी परिसर में ही लग रही थी। हड्डी रोग के अधिकांश मरीज गंभीर हाल के होने के कारण यह व्यवस्था की गई है।
अगर चिकित्सक की ओपीडी ड्यूटी है, तो मरीज का पंजीकरण न होने पर भी व्यवस्था कराई जा रही है। इनका पंजीकरण मौके पर कराया जा रहा है। मरीजों को चाहिए कि वह पंजीकरण पहले कराएं और यह देख लें कि उनके चिकित्सक का नंबर किस दिन है। अगर मरीज की हालत गंभीर है तो उसे इमरजेंसी में उपचार दिया जाता है।
हड्डी रोग की इमरजेंसी में लगेगी ओपीडी
हड्डी रोग विभाग की ओपीडी अब इमरजेंसी में लगाई जाएगी। अभी तक यह ओपीडी परिसर में ही लग रही थी। हड्डी रोग के अधिकांश मरीज गंभीर हाल के होने के कारण यह व्यवस्था की गई है।
पंजीकरण वाले मरीजों को नहीं आई कोई परेशानी
पंजीकरण वाले मरीजों को कोड वर्ड देखकर प्रवेश दिया जा रहा है। इनको भीड़ और लाइन में भी नहीं लगना पड़ रहा। चिकित्सक भी इनको पूरा समय देकर समस्या पूछ रहे हैं। तय मरीज होने पर रक्त संबंधी जांच भी मौके पर ही हो रही है। इनका रिसेप्शन सेंटर पर नमूना लिए जा रहे हैं। यहीं से रिपोर्ट भी मिल जाती है। रोजाना 30 से अधिक मरीजों की जांच हो रही है।
एसएन ओपीडी
नए मरीज: 265
पंजीकरण: 169
मेडिसिन: 86
ईएनटी: 46
टीबी-सांस: 22
दंत रोग: 11
स्त्री रोग: 06
रेडियोथेरेपी: 04
एआरटी: 03
मानसिक: 01
इमरजेंसी: 86
एसएन ओपीडी
नए मरीज: 265
पंजीकरण: 169
मेडिसिन: 86
ईएनटी: 46
टीबी-सांस: 22
दंत रोग: 11
स्त्री रोग: 06
रेडियोथेरेपी: 04
एआरटी: 03
मानसिक: 01
इमरजेंसी: 86