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देश की आजादी के लिए सहीं यातनाएं, बेरुखी का शिकार हैं उत्तराधिकारी

Sun, 23 Jan 2022 11:19 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 11:19 PM IST
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negligence over freedom fighter's relatives
कासगंज। देश की आजादी में जिले के सेनानियों का अहम किरदार रहा। इनमें टुंडा सिंह वीर और हाकिम सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने कई बार अंग्रेजी हुकूमत की यातनाएं सहीं। आज इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की यादें जिले के लोग संजोए हुए हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की बेरुखी से इनके उत्तराधिकारी मायूस हैं। कोई पेंशन के लिए परेशान है तो कोई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की प्रतिमा के लिए भटक रहा है।
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टुंडा सिंह वीर
टुंडा सिंह वीर सहावर गेट के रहने वाले थे, लेकिन अब उनका परिवार दुर्गा कॉलोनी में रह रहा है। देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में ये भी वीर की तरह लड़े और इनकी देशभक्ति की भावना अडिग रही। सन 1930 में इनकी पहली गिरफ्तारी हुई। चार महीने की सजा हुई। 1932 में उन्होंने 6 महीने तक जेल में यातनाएं सहीं। 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में इनको 9 महीने की सजा हुई। 1942 में 6 महीने की सजा हुई। 1943 में बरेली के कमिश्नर के सामने नारे लगाने पर भी सजा भुगतनी पड़ी। देश की स्वतंत्रता के लिए टुंडा सिंह वीर महात्मा गांधी के साथ आंदोलन करते रहे। आज उनके परिवार को सरकारी संरक्षण की दरकार है। उनके बेटे सुमन प्रकाश बुजुर्ग हैं। वे अब पेंशन के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनके बेटे अपनी पत्नी के साथ एक छोटे से घर में रहते हैं और गरीबी की जिंदगी जी रहे हैं। वे कहते हैं कि कई बार पेंशन के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन कोई आवेदन नहीं दे रहा।
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स्वतंत्रता सेनानी हाकिम सिंह
स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका हाकिम सिंह ने भी निभाई। मूूल रूप से जिले के गांव भूपालगढ़ी के रहने वाले हाकिम सिंह 1941 और 1943 में जेल गए। आंदोलन में सहभाग करने के दौरान उन्होंने नारे लगाए तो उन्हें जेल की सलाखों में रहना पड़ा। कभी 4 महीने जेल में रहे तो कभी 9 महीने तक की सजा हुई, लेकिन वे अपने उद्देश्य से नहीं भटके। महात्मा गांधी हों या अन्य स्वतंत्रता सेनानी। इन सबके कदम से कदम मिलाकर वे आगे बढ़े, लेकिन आज उनके बलिदान को भी सम्मान नहीं मिल पा रहा है। इनके बेटे गजराज सिंह और बाबू सिंह गांव में रहते हैं। बड़े बेटे गजराज सिंह का कहना है कि उनके बलिदान को सरकारी तंत्र ने कोई सम्मान नहीं दिया। गांव में उनकी प्रतिमा लगवाने के लिए भटक रहे हैं। अफसरों से फरियाद लगा चुके हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
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