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भाई की संपत्ति के बहाने नसीमुद्दीन ने फिर बोला मायावती पर हमला
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 08 Aug 2017 09:53 PM IST
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी
- फोटो : अमर उजाला
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बसपा से निकाले गए एमएलसी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा अध्यक्ष मायावती के भाई आनंद कुमार पर 36 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति होने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को फतेहाबाद रोड स्थित होटल में अपने समर्थकों को संबोधित करने आए राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा के संयोजक नसीमुद्दीन ने कहा कि साल 2002 में मायावती का भाई आनंद कुमार चपरासी के पद पर उन्होंने ही अपने विभाग में नौकरी पर लगाया था।
अब क्या कृपा बरसी कि वह 36 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हो गए। वहीं, बसपा संस्थापक कांशीराम के छोटे भाई दरबारा सिंह पर ट्रेन का टिकट खरीदने के भी पैसे नहीं हैं। मायावती इसका जवाब दें।
नसीमुद्दीन ने कांशीराम के साथ संस्मरणों को सुनाया और पूछा कि कांशीराम की तरह मायावती ने भी क्या लाई-चना खाकर, नदी-तालाब किनारे सोकर दलित आंदोलन खड़ा किया है। उन्हें हर टिकट, जन्मदिन, रैली के लिए रुपया चाहिए था। कांशीराम के समय पार्टी मिशन थी, लेकिन मायावती ने इसे रुपये में तोलना शुरू कर दिया।
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मंगलवार को फतेहाबाद रोड स्थित होटल में अपने समर्थकों को संबोधित करने आए राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा के संयोजक नसीमुद्दीन ने कहा कि साल 2002 में मायावती का भाई आनंद कुमार चपरासी के पद पर उन्होंने ही अपने विभाग में नौकरी पर लगाया था।
अब क्या कृपा बरसी कि वह 36 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हो गए। वहीं, बसपा संस्थापक कांशीराम के छोटे भाई दरबारा सिंह पर ट्रेन का टिकट खरीदने के भी पैसे नहीं हैं। मायावती इसका जवाब दें।
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नसीमुद्दीन ने कांशीराम के साथ संस्मरणों को सुनाया और पूछा कि कांशीराम की तरह मायावती ने भी क्या लाई-चना खाकर, नदी-तालाब किनारे सोकर दलित आंदोलन खड़ा किया है। उन्हें हर टिकट, जन्मदिन, रैली के लिए रुपया चाहिए था। कांशीराम के समय पार्टी मिशन थी, लेकिन मायावती ने इसे रुपये में तोलना शुरू कर दिया।
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माया का इस्तीफा ड्रामा
मायावती
कभी बसपा में नंबर दो की हैसियत में रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने राज्यसभा से बसपा अध्यक्ष मायावती के इस्तीफे को ड्रामा करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर तीन बार की मुख्यमंत्री, एक पार्टी की अध्यक्ष को राज्यसभा में नहीं बोलने दिया जा रहा तो उनके सदस्यों की क्या बिसात।
अपने साथ उन्हें अपने अन्य सांसदों का भी इसी आधार पर इस्तीफा दिलाना चाहिए था, लेकिन इसमें भी सतीश चंद्र मिश्रा का हाथ है। मायावती के इस्तीफे के बाद वह सदन में पार्टी नेता बन जाएंगे।
पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर भी उनकी नजर है। अगर दलित हितैषी मुद्दे पर ही मायावती को इस्तीफा देना था तो रोहित वेमुला और फरीदाबाद कांड पर क्यों नहीं दिया।
अपने साथ उन्हें अपने अन्य सांसदों का भी इसी आधार पर इस्तीफा दिलाना चाहिए था, लेकिन इसमें भी सतीश चंद्र मिश्रा का हाथ है। मायावती के इस्तीफे के बाद वह सदन में पार्टी नेता बन जाएंगे।
पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर भी उनकी नजर है। अगर दलित हितैषी मुद्दे पर ही मायावती को इस्तीफा देना था तो रोहित वेमुला और फरीदाबाद कांड पर क्यों नहीं दिया।