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बढने लगी नरौरा की प्यास, सूखने लगा गोरहा नहर का कंठ
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कासगंज। जिले भर में नहर और नदियों का जाल बिछा हुआ है। तब भी जिले के किसान सरकारी सिंचाई योजना का पर्याप्त लाभ नहीं उठा पा रहे। इसका कारण है कि बैराजों पर पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। इससे गोरहा नहर को भी मांग के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है। एक हजार क्यूसेक पानी की मांग के सापेक्ष इस नहर को मात्र 150 क्यूसेक पानी ही मिल सका है।
इन दिनों सिंचाई के लिए किसान परेशान हैं। फसलों को पानी की जरूरत है तो खाली पड़े खेतों को पलेवा की जरूरत है। किसानों को निजी संसाधनों पर आश्रित रहना पड़ रहा है। गोरहा नहर में बेहद कम पानी है। इस नहर को 1 हजार क्यूसेक पानी की जरूरत थी, जिसकी मांग नरौरा बैराज के अफसरों को सिंचाई विभाग के अधिकारियाें ने भेजी, इसके बाद पानी तो मिला है लेकिन मात्र 150 क्यूसेक, जो इस नहर से जुड़े गांव के किसानों के खेतों के लिए पर्याप्त नहीं है। सिंचाई विभाग ने स्वयं माना है कि इतने पानी से पूरी सिंचाई का लाभ मिलना संभव नहीं है। विभाग ने बताया कि पहाड़ों से बैराजों तक पानी कम आ रहा है।
आंकड़े की नजर से-
- 1100 क्यूसेक पानी की क्षमता है गोरहा नहर की।
- 1000 क्यूसेक पानी की हुई थी मांग।
- 500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के नरौरा बैराज से छोड़े जाने के मिले थे संकेत।
- 150 क्यूसेक पानी ही गोरहा नहर को मिला।
- गोरहा नहर को कम मात्रा में पानी मिला है क्योंकि नरौरा बैराज पर ही पानी कम है। जैैसे ही पानी वहां से और बढ़ जाएगा तो नहर में नीचे की ओर के लिए बहाव तेज हो जाएगा। इससे सिंचाई का लाभ आसानी से मिल सकेगा। अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।
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इन दिनों सिंचाई के लिए किसान परेशान हैं। फसलों को पानी की जरूरत है तो खाली पड़े खेतों को पलेवा की जरूरत है। किसानों को निजी संसाधनों पर आश्रित रहना पड़ रहा है। गोरहा नहर में बेहद कम पानी है। इस नहर को 1 हजार क्यूसेक पानी की जरूरत थी, जिसकी मांग नरौरा बैराज के अफसरों को सिंचाई विभाग के अधिकारियाें ने भेजी, इसके बाद पानी तो मिला है लेकिन मात्र 150 क्यूसेक, जो इस नहर से जुड़े गांव के किसानों के खेतों के लिए पर्याप्त नहीं है। सिंचाई विभाग ने स्वयं माना है कि इतने पानी से पूरी सिंचाई का लाभ मिलना संभव नहीं है। विभाग ने बताया कि पहाड़ों से बैराजों तक पानी कम आ रहा है।
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आंकड़े की नजर से-
- 1100 क्यूसेक पानी की क्षमता है गोरहा नहर की।
- 1000 क्यूसेक पानी की हुई थी मांग।
- 500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के नरौरा बैराज से छोड़े जाने के मिले थे संकेत।
- 150 क्यूसेक पानी ही गोरहा नहर को मिला।
- गोरहा नहर को कम मात्रा में पानी मिला है क्योंकि नरौरा बैराज पर ही पानी कम है। जैैसे ही पानी वहां से और बढ़ जाएगा तो नहर में नीचे की ओर के लिए बहाव तेज हो जाएगा। इससे सिंचाई का लाभ आसानी से मिल सकेगा। अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।
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