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नरहरि देव महाराज का 393 प्राकट्य उत्सव मनाया
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हरिदासीय राधप्रसाद सेवा ट्रस्ट के आश्रम में नरहरि देव महाराज के प्राकट्य महोत्सव पर समाज गायन क?
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। श्री हरिदासीय राधाप्रसाद सेवा ट्रस्ट और श्री हरिदासीय रसो उपासना पीठ ललित कुंज परिक्रमा मार्ग में श्रीस्वामी नरहरि देवजी महाराज का 393वां प्राकट्य महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। ठाकुर श्रीराधा ललित बिहारीजी महाराज की मंगलाचरण आरती एवं समाज गायन से प्रारंभ पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी राधाप्रसाद देव जी महाराज के सानिध्य में किया गया।
महामंडलेश्वर राधाप्रसाद देव महाराज ने बताया नरहरि देवजी भगवान जगन्नाथजी के अवतार थे। आपने एक वनिक के कोड़ का भी निवारण किया और बताया कि एक बार महंत मुरारी दासजी चार सौ शिष्यों की जमात लेकर आपके यहां पधारे और छह महीने मऊ भोज की दशान नदी के किनारे आप के स्थान पर रुके जो सनकादिक मुनियों की तपस्थली की भी नगरी कही जाती है।
एक दिन आपके मन में राम चकला बनाकर संतों को खिलाने की मन में आई शिष्यों द्वारा दशमन दाल भिजा दी गई। शिष्य घबराकर बोले गुरुदेव यह दाल इतनी कैसे पिसेगी गुरुदेव भगवान ने शिष्यों को भजन करने की आज्ञा दी और कहा दाल पिस जाएगी। थोड़ी देर में चारों भाई सनकादिक आए और चार घड़ी में सब दाल पीसकर चले गए। ऐसी कथाएं नरहरि देवजू महाराजजी की बहुत हैं। महंत मोहिनी बिहारी शरण, मदन बिहारी दास, राधेश्याम बाबा, गौर सुंदरदास बाबा, कुंजबिहारी बाबा, सूरज मिश्रा, बिहारीदास बाबा उपस्थित थे।
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महामंडलेश्वर राधाप्रसाद देव महाराज ने बताया नरहरि देवजी भगवान जगन्नाथजी के अवतार थे। आपने एक वनिक के कोड़ का भी निवारण किया और बताया कि एक बार महंत मुरारी दासजी चार सौ शिष्यों की जमात लेकर आपके यहां पधारे और छह महीने मऊ भोज की दशान नदी के किनारे आप के स्थान पर रुके जो सनकादिक मुनियों की तपस्थली की भी नगरी कही जाती है।
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एक दिन आपके मन में राम चकला बनाकर संतों को खिलाने की मन में आई शिष्यों द्वारा दशमन दाल भिजा दी गई। शिष्य घबराकर बोले गुरुदेव यह दाल इतनी कैसे पिसेगी गुरुदेव भगवान ने शिष्यों को भजन करने की आज्ञा दी और कहा दाल पिस जाएगी। थोड़ी देर में चारों भाई सनकादिक आए और चार घड़ी में सब दाल पीसकर चले गए। ऐसी कथाएं नरहरि देवजू महाराजजी की बहुत हैं। महंत मोहिनी बिहारी शरण, मदन बिहारी दास, राधेश्याम बाबा, गौर सुंदरदास बाबा, कुंजबिहारी बाबा, सूरज मिश्रा, बिहारीदास बाबा उपस्थित थे।
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