भगवान नेमीनाथ का प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू, शौरीपुर में भव्य रूप से बनाई गई द्वारिकापुरी
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यमुना के बियावान जंगल में गुरुवार से भव्य नजारा दिखाई देने लगा है। भगवान नेमीनाथ के प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए द्वारिकापुरी विकसित की गई है। इसके लोकार्पण के साथ ही महोत्सव का आगाज हो गया है। नव निर्मित मंदिर के पास में ही आवास के तंबू अहमदाबाद के कारीगरों ने भव्य नगरी के रूप में विकसित किए हैं। जिसे देखने वाले सराहना करते नहीं थकते हैं।
शौरीपुर श्वेतांबर तीर्थ ट्रस्ट के प्रवक्ता विनीत गोलेच्छा और रोबिन जैन ने बताया कि वाटर प्रूफ तंबू सभी सुविधाओं से लैस है। इटैनियन टॉयलेट है। नहाने के लिए पानी गर्म करने को गीजर लगाए गए हैं। इन तंबुओं में तीन हजार लोगों के ठहरने का इंतजाम है। भोजन पंडाल भी अहमदाबाद के कारीगरों ने तैयार किया है। 50 हलवाई अहमदाबाद से ही यहां पहुंचे है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जैन उर्फ मुन्ना बाबू ने बताया कि स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है। यहां पर महाराष्ट्र, जयपुर, अहमदाबाद, दिल्ली, जोधपुर, जयपुर, समेत देश के विभिन्न इलाकों से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। शौरीपुर में महोत्सव के लिए विकसित द्वारिकापुरी के भव्य नजारे को देखने के लिए बुधवार को दिन भर बाह क्षेत्र के गांवों के लोगों का आना जाना बना रहा।
जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ श्रीकृष्ण के चचेरे भाई हैं। शौरीपुर भगवान नेमीनाथ की च्यवन एवं जन्म कल्याणक नगरी है। इसे महाभारत काल में राजा सूरसेन ने बसाया था। उनके नाती समुद्र विजय से भगवान नेमीनाथ का तथा वसुदेव से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
साहित्यकार डॉ वीपी मिश्र कहते हैं कि सूरसेन के पुत्र अंधक वृष्णि के बेटे समुद्र विजय से भगवान नेमीनाथ का तथा वसुदेव से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। राष्ट्र संत पद्म सागर सूरीश्वर महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान नेमीनाथ चचेरे भाई हैं। शौरीपुर भगवान नेमीनाथ की च्यवन एवं जन्म कल्याणक स्थली है।
वर्तमान में शौरीपुर में भगवान नेमीनाथ के मंदिर हैं। इन्हीं पुराने मंदिर की जगह पर शौरीपुर श्वेतांबर तीर्थ ट्रस्ट द्वारा नए मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसमें भगवान नेमीनाथ का मां शिवा देवी, पिता समुद्र विजय के साथ सोमवार को प्रवेश हो चुका है। गुरुवार से 25 फरवरी तक प्रतिष्ठा महोत्सव के मुख्य आयोजन शुरू होंगे।