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विश्व योग दिवस पर ओमकार ध्वनि के बीच होगा 'नाद योग', भगवान शिव हैं इसके प्रणेता
Thu, 20 Jun 2019 09:10 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 20 Jun 2019 09:10 PM IST
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ताजनगरी के पार्कों और एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में जहां हजारों लोग योग करेंगे, वहीं संगीत कला केंद्र शास्त्रीपुरम में भी योग दिवस को यादगार बनाया जाएगा। केंद्र पर बच्चे शुक्रवार को नाद योग करेंगे। छह साल से लेकर 24 साल तक के युवा संगीत साधक नाद योग का प्रदर्शन करेंगे।
बीडी जैन डिग्री कॉलेज के संगीत विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष केशव तलेगांवकर पश्चिमपुरी स्थित संगीत कला केंद्र में इन बच्चों को पांच साल से नाद योग सिखा रहे हैं। साथ ही शहर के लगभग एक दर्जन स्कूलों में बच्चों को नाद योग सिखा चुके हैं। उन्होंने बताया कि नाद का संबंध ध्वनि से है। रक्त प्रवाह पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
क्या है नाद योग
नाद योग के प्रणेता भगवान शिव हैं। इस योग में ओमकार और मंत्रोच्चारण होता है। पहले तीन स्वरों उद्दात, अनुद्दात और स्वरित में वैदिक मंत्र बोले जाते थे। नाद योग मानसिक रूप से लोगों को स्वस्थ रखता है।
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बीडी जैन डिग्री कॉलेज के संगीत विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष केशव तलेगांवकर पश्चिमपुरी स्थित संगीत कला केंद्र में इन बच्चों को पांच साल से नाद योग सिखा रहे हैं। साथ ही शहर के लगभग एक दर्जन स्कूलों में बच्चों को नाद योग सिखा चुके हैं। उन्होंने बताया कि नाद का संबंध ध्वनि से है। रक्त प्रवाह पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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क्या है नाद योग
नाद योग के प्रणेता भगवान शिव हैं। इस योग में ओमकार और मंत्रोच्चारण होता है। पहले तीन स्वरों उद्दात, अनुद्दात और स्वरित में वैदिक मंत्र बोले जाते थे। नाद योग मानसिक रूप से लोगों को स्वस्थ रखता है।
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नाद योग करने से वर्तमान पीढ़ी को भी ओमकार और वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करने को मिल रहा है। ओमकार ध्वनि के पांच स्वर, अकार, आकार, उकार, ईकार, ओकार होते हैं।
फ्रांस और चीन तक पहुंचा नाद योग
नाद योग का प्रचार-प्रसार चीन, साउथ अफ्रीका और फ्रांस में लोग सीख रहे हैं। संगीतज्ञ केशव तलेंगांवकर का कहना है कि सन 2011 से सन 2013 तक चीन में भारतीय दूतावास केमाध्यम से लगभग पांच सौ लोगों को नाद योग सिखा चुके हैं।
इसके अलावा साउथ अफ्रीका में एक महीने में तीन सौ लोगों और फ्रांस में एक महीने में दो सौ लोगों को नाद योग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
फ्रांस और चीन तक पहुंचा नाद योग
नाद योग का प्रचार-प्रसार चीन, साउथ अफ्रीका और फ्रांस में लोग सीख रहे हैं। संगीतज्ञ केशव तलेंगांवकर का कहना है कि सन 2011 से सन 2013 तक चीन में भारतीय दूतावास केमाध्यम से लगभग पांच सौ लोगों को नाद योग सिखा चुके हैं।
इसके अलावा साउथ अफ्रीका में एक महीने में तीन सौ लोगों और फ्रांस में एक महीने में दो सौ लोगों को नाद योग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।