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ट्रंप के निर्णय पर गुस्से में मुस्लिम समाज, जारी है अमेरिकी राष्ट्रपति का विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा/फिरोजाबाद
Updated Sat, 23 Dec 2017 08:15 AM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
जमीयत उलमा ए हिंद ने फिलस्तीन पर इजराइल के अवैध कब्जे के विरोध में शुक्रवार को प्रदर्शन किया गया। शहर की सभी मस्जिदों में विशेष प्रार्थना की गई। इस मौके पर इजराइल के कदम की कड़ी निंदा की गई।
जिलाध्यक्ष मौलाना शफी कासमी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने येरुशलम को इजराइल की राजधानी घोषित करने और वहां दूतावास स्थापित करने का फैसला इंसाफ के खिलाफ है। मौलाना इश्तियाक साहब ने कहा कि येरुशलम में मुसलमानों का पवित्र स्थान है।
यहां इस्लाम धर्म से भी पूर्व आसमानी धर्म के अनेक अवतार आए हैं। अमेरिका के फैसले से मुसलमानों का नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत का दिल दुखा है। जिला महासचिव मुफ्ती कासिम रजी ने कहा कि हिंदुस्तान के सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के मानने वाले भी येरुशलम वासियों का दर्द समझते हैं।
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जिलाध्यक्ष मौलाना शफी कासमी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने येरुशलम को इजराइल की राजधानी घोषित करने और वहां दूतावास स्थापित करने का फैसला इंसाफ के खिलाफ है। मौलाना इश्तियाक साहब ने कहा कि येरुशलम में मुसलमानों का पवित्र स्थान है।
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यहां इस्लाम धर्म से भी पूर्व आसमानी धर्म के अनेक अवतार आए हैं। अमेरिका के फैसले से मुसलमानों का नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत का दिल दुखा है। जिला महासचिव मुफ्ती कासिम रजी ने कहा कि हिंदुस्तान के सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के मानने वाले भी येरुशलम वासियों का दर्द समझते हैं।
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
वहीं मथुरा के कोसीकलां कोसीकलां में जमीयत उलमा-ए-हिंद के बैनर तले यरुशलम को इजरायल की राजधानी बनाने के अमेरिकी फैसले के खिलाफ जुमे की नमाज के बाद मरकज मस्जिद में सभा का आयोजन किया गया। अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्थानीय प्रशासन की तरफ से संयुक्त राष्ट्र महासचिव को ज्ञापन भेजा गया।
सभा में हाफिज यामीन, हाफिज बदरुद्दीन ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा फिलीस्तीन समर्थक रही है लेकिन मौजूदा सरकार के इजराइल से गहरे संबंध हैं इसलिए भारत सरकार अपनी विदेश नीति पर पुनर्विचार करे और इजराइल से ये संबंध समाप्त करे।
आबिद हुसैन ने कहा कि यरूशलम फिलिस्तीन की राजधानी है और यरूशलम पर मुसलमानों का पहला अधिकार है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ट्रंप के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए संयुक्त राष्ट्र को ज्ञापन भी भेजा।
सभा में हाफिज यामीन, हाफिज बदरुद्दीन ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा फिलीस्तीन समर्थक रही है लेकिन मौजूदा सरकार के इजराइल से गहरे संबंध हैं इसलिए भारत सरकार अपनी विदेश नीति पर पुनर्विचार करे और इजराइल से ये संबंध समाप्त करे।
आबिद हुसैन ने कहा कि यरूशलम फिलिस्तीन की राजधानी है और यरूशलम पर मुसलमानों का पहला अधिकार है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ट्रंप के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए संयुक्त राष्ट्र को ज्ञापन भी भेजा।
सिटी मजिस्ट्रेट को दिया ज्ञापन
आगरा में जमीअत उलमा-ए-हिंद के आह्वान पर शुक्रवार को मुस्लिम धर्मगुरुओं ने येरुशलम को इजराइल की राजधानी घोषित करने के अमेरिका के फैसले पर विरोध जताते हुए कलक्ट्रेट में एडीएम सिटी केपी सिंह को ज्ञापन सौंपा। नायब काजी मौलाना मोहम्मद उजैर आलम के नेतृत्व में उलमा कराम के प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।