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तीनों दोस्तों पर सोते हुए चाकू से बोला गया हमला
अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:12 AM IST
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इंद्रजीत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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हम तीनों बाहर गए थे। वहां कुछ युवकों से झगड़ा हो गया था। उनमें एक युवती भी थी। इसके बाद हम वापस आकर अपने कमरे में सो गए। मुजफ्फरनगर का प्रणव शांडिल्य, गाजियाबाद का अंकुर सिंह और मैं एक ही कमरे में थे। पहले हम हॉस्टल में रहते थे, लेकिन कुछ दिन पहले इसी किराए के कमरे में शिफ्ट हो गए थे। हमें गहरी नींद आ गई। तभी अचानक से हमला हुआ। वे लोग चाकू लेकर आए और ताबड़तोड़ वार किए चले गए। उनमें एक युवती भी थी।
उनका इरादा तीनों को जान से मारने का था। मुझे मरा समझकर छोड़ गए। यह कहते कहते इंद्रजीत चौहान फोन पर सुबकने लगता है। उसके पिता नरेंद्र चौहान हौंसला देते हैं, बेटा, तू घबरा मत, सब ठीक हो जाएगा, हमारी सरकार मदद करेगी।
बोदला के पास माहौर गली में छोटी सी बेकरी चलाने वाले नरेंद्र चौहान आवास विकास के सेक्टर एक में मकान नंबर 283 में रहते हैं। उन्होंने बताया कि इंद्रजीत चौहान का फोन कल रविवार को शाम चार बजे ( वहां के 12 बजे ) आया था। घटना शनिवार की रात में हुई। वह गंभीर रूप से घायल है। उस समय आईसीयू में था, अब बाहर आ गया है।
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उसने बताया था कि कुछ युवकों से जरा सी कहासुनी हुई थी। इसमें वे जान के दुश्मन बन गए और हमला बोल दिया। तीनों को संभलने का मौका भी नहीं दिया। वार पर वार किए चले गए। उसे यह भी नहीं मालूम है कि हमलावर पकड़े गए या भाग निकले। हालांकि इतनी जानकारी है कि पुलिस मौके पर थोड़ी ही देर में पहुंच गई थी।
अगले महीने घर आएगा इन्द्रजीत
इंद्रजीत चौहान यूक्रेन में छह साल का कोर्स कर रहा है। इसमें पांच साल एमबीबीएस और एक साल एमडी या एमएस की पढ़ाई होती है। उसने 2011 में दाखिला लिया था। अगले महीने मई में पांच साल पूरे होने वाले हैं। वह हर साल मई में घर आता है और फिर अक्तूबर में वापस जाता है।
दोस्तों के कहने गया था यूक्रेन
नरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शिकोहाबाद ( फीरोजाबाद) के नगला गुलाल इंटर कॉलेज से 2009 में इंटर पास किया। इसके बाद आगरा कॉलेज आगरा में एक साल बीएससी (बायो) की। शिकोहाबाद में उसके साथ हास्टल में रहने वाले उसके दोस्तों ने 2010 में यूक्रेन में एमबीबीएस में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि वहां दाखिला आसान और पढ़ाई सस्ती है। इस पर उसने जिद करके वहां एडमिशन कराया।
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उनका इरादा तीनों को जान से मारने का था। मुझे मरा समझकर छोड़ गए। यह कहते कहते इंद्रजीत चौहान फोन पर सुबकने लगता है। उसके पिता नरेंद्र चौहान हौंसला देते हैं, बेटा, तू घबरा मत, सब ठीक हो जाएगा, हमारी सरकार मदद करेगी।
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बोदला के पास माहौर गली में छोटी सी बेकरी चलाने वाले नरेंद्र चौहान आवास विकास के सेक्टर एक में मकान नंबर 283 में रहते हैं। उन्होंने बताया कि इंद्रजीत चौहान का फोन कल रविवार को शाम चार बजे ( वहां के 12 बजे ) आया था। घटना शनिवार की रात में हुई। वह गंभीर रूप से घायल है। उस समय आईसीयू में था, अब बाहर आ गया है।
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उसने बताया था कि कुछ युवकों से जरा सी कहासुनी हुई थी। इसमें वे जान के दुश्मन बन गए और हमला बोल दिया। तीनों को संभलने का मौका भी नहीं दिया। वार पर वार किए चले गए। उसे यह भी नहीं मालूम है कि हमलावर पकड़े गए या भाग निकले। हालांकि इतनी जानकारी है कि पुलिस मौके पर थोड़ी ही देर में पहुंच गई थी।
अगले महीने घर आएगा इन्द्रजीत
इंद्रजीत चौहान यूक्रेन में छह साल का कोर्स कर रहा है। इसमें पांच साल एमबीबीएस और एक साल एमडी या एमएस की पढ़ाई होती है। उसने 2011 में दाखिला लिया था। अगले महीने मई में पांच साल पूरे होने वाले हैं। वह हर साल मई में घर आता है और फिर अक्तूबर में वापस जाता है।
दोस्तों के कहने गया था यूक्रेन
नरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शिकोहाबाद ( फीरोजाबाद) के नगला गुलाल इंटर कॉलेज से 2009 में इंटर पास किया। इसके बाद आगरा कॉलेज आगरा में एक साल बीएससी (बायो) की। शिकोहाबाद में उसके साथ हास्टल में रहने वाले उसके दोस्तों ने 2010 में यूक्रेन में एमबीबीएस में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि वहां दाखिला आसान और पढ़ाई सस्ती है। इस पर उसने जिद करके वहां एडमिशन कराया।