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मैनपुरी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हत्यारोपियों ने किया सरेंडर, 33 साल बाद गए जेल

Sun, 28 Jul 2019 12:46 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 28 Jul 2019 12:46 AM IST
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murder accused surrender on orders of supreme court in mainpuri
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
मैनपुरी के करहल क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड के पांच आरोपी 33 साल बाद जेल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों ने अपर जिला जज की कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इसके बाद उनकी अपील पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
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थाना करहल क्षेत्र में वर्ष 1983 में प्रधान चुनाव की रंजिश के चलते पिता-पुत्री की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई की ओर से पास के ही गांव के पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई है। 
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इसके बाद अपर जिला जज षष्टम ने वर्ष 1986 में पांचों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों ने जेल जाने के बाद सजा कम कराने कए लिए हाईकोर्ट में अपील की। इस बीच उनकी हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो गई। 
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हाईकोर्ट में अपील खारिज होने के बाद आरोपियों ने सजा कम कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश दिया। इसके तहत पहले आरोपी संबंधित अदालत में सरेंडर करें। तभी उनकी अपील पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पांचों आरोपियों ने अपर जिला जज षष्टम की कोर्ट में सरेंडर कर दिया है।

यह है मामला

थाना करहल के तुलसीरपुर निवासी रामदास यादव और उनकी पुत्री फूलप्यारी की वर्ष 1983 में प्रधान चुनाव की रंजिश के चलते गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। रामदास के भाई किशनलाल ने गोपियापुर निवासी सतीशचंद्र यादव, रामसिंह यादव, महेशचंद्र यादव, अभयराम शाक्य, गोपाल शाक्य के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई। इस मुकदमे में वर्ष 1986 में पांचों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

देर से सही न्याय तो मिला

रामदास की हत्या के समय उनके पौत्र राजेश यादव नाबालिग थे। जब समझदार हुए तब तक आरोपियों को सजा हो गई। आरोपियों द्वारा की गई अपील का राजेश ने हर स्तर पर विरोध भी किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों के जेल जाने से वह खुश हैं। उनका कहना है देरी से ही सही लेकिन न्याय तो मिला है।
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