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UP: भाई-भाभी और चार मासूम भतीजों के कत्ल का इल्जाम...12 साल की कैद, जेल से रिहा हुए गंभीर ने बयां किया दर्द

Thu, 13 Feb 2025 02:21 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 13 Feb 2025 02:21 PM IST
सार

भाई-भाभी और चार मासूम भतीजियों के कत्ल का इल्जाम में 12 साल जेल में रहने के बाद जब गंभीर सिंह बाहर आया, तो उसने अपना दर्द बयां किया। बताया कि अपनों की मौत का दुख किसे नहीं होता है। उसे झूठा फंसाया गया। वो जेल में इतना रोया कि आंखों के आंसू भी सूख गए थे। 

 

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murder Accused of bhai bhabi and four innocent nieces 12 years imprisonment Gambhir pain released from jail
गंभीर सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के अछनेरा थाना क्षेत्र के गांव तुरकिया में 12 साल पहले हुए सामूहिक हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी होने वाले गंभीर सिंह को केंद्रीय कारागार से बुधवार को रिहाई मिल गई। बाहर आते ही उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। उसका कहना था कि जमीन हड़पने के लिए कुछ लोगों ने फंसाया। भाई और उसके परिवार का कत्ल किया गया। 
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गंभीर सिंह ने बताया कि अपनों की मौत का दर्द किसे नहीं होता है। वो जेल में जब पहुंच गया तो अपनों की बहुत याद आई। वो भाई-भाभी और भतीजों के लिए इतना रोया कि आंखों के आंसू भी सूख गए। अब उसे पुरानी जिंदगी से कोई लेना-देना नहीं है। गांव में जान का खतरा है। सुरक्षा की मांग करेगा। 




 
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नौ मई 2012 को गांव तुरकिया निवासी सत्यभान, उनकी पत्नी पुष्पा सहित चार बच्चों की सामूहिक हत्या की गई थी। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया। सत्यभान के भाई गंभीर सिंह सहित बहन गायत्री और दोस्त को जेल भेजा था। स्थानीय अदालत ने गंभीर सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा था। पुलिस की विवेचना में लापरवाही और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने दो सप्ताह पहले उसे बरी कर दिया था। गंभीर केंद्रीय कारागार में निरुद्ध था। सेंट्रल जेल के जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि मंगलवार देर रात बंदी गंभीर की रिहाई का आदेश आया था। बुधवार सुबह 9 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया।

 
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एक दिन पहले गांव से चला आया था
जेल से बाहर आते ही गंभीर सिंह ने एक ही बात कही कि उसे सामूहिक हत्याकांड में गलत फंसाया गया। वह जयपुर के पास निबाई में एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था। भाई सत्यभान ने एक दिन काॅल करके कहा कि गांव में झगड़ा हो गया है। जल्दी गांव पहुंच जाओ। वह आ गया। भाई ने उसे गांव में बुलाया। हत्याकांड से एक दिन पहले भाई सत्यभान ने उसे एक हजार रुपये दिए। तब बहन गायत्री घर में रह रही थी। भाई उसको ससुराल छोड़कर आने की कहने लगा। इस पर वह बहन को लेकर गांव से चला गया। फिर क्या हुआ, वह नहीं जानता। मगर, ईदगाह स्टेशन पर खड़ा हुआ था, तब पुलिस आई। उसे पकड़ लिया। पता चला कि भाई और भाभी सहित बच्चों की हत्या कर दी गई है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
 
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