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आरती के साथ जियारतः गणेश व ताजिया पंडालों में महक रही सद्भाव की 'खुशबू'
Tue, 10 Sep 2019 12:01 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 10 Sep 2019 12:01 AM IST
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गणेश व ताजिया पंडाल
- फोटो : वीडियो से ली गई तस्वीर
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नुनिहाई में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिल रही है। यहां गणेश और ताजिये के पंडाल बराबर में स्थित हैं। एक पंडाल में गणेश वंदना के स्वर गूंजते हैं तो दूसरे में ताजिए की जियारत के लिए मुस्लिम जुटते हैं। दोनों एक दूसरे के कार्यक्रमों में शरीक होते हैं।
यमुनापार के नुनिहाई सब्जी मंडी रोड पर गणेश चतुर्थी पर आठ साल से पंडाल में गणेश प्रतिमा को विराजमान किया जाता है। यहां सुबह और शाम को आरती और भजन कीर्तन के कार्यक्रमों का सिलसिला अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इसी पंडाल के बराबर में ही ताजिये का पंडाल बना हुआ है।
ये भी पढ़ें: मोहर्रम: करबला के शहीदों की याद में पढ़े कलाम, इमामबाड़ों से निकाले गए अलम के जुलूस
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गणेश पंडाल लगाने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि पिछले आठ साल से गणेश पंडाल लगाया जा रहा है। ताजियेदारी करने वाले खलील खान कहते हैं कि उनके पिता ने करीब 40 साल पहले यहां ताजिये रखने की शुरुआत की थी। अब बगल में गणेश पंडाल भी है। शाम को दोनों ही पंडालों में श्रद्धालु जुटते हैं। एक ओर जियारत तो दूसरी ओर आरती होती है। आसपास के लोग भी इसे सद्भाव की मिसाल मानते हैं।
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यमुनापार के नुनिहाई सब्जी मंडी रोड पर गणेश चतुर्थी पर आठ साल से पंडाल में गणेश प्रतिमा को विराजमान किया जाता है। यहां सुबह और शाम को आरती और भजन कीर्तन के कार्यक्रमों का सिलसिला अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इसी पंडाल के बराबर में ही ताजिये का पंडाल बना हुआ है।
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गणेश पंडाल लगाने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि पिछले आठ साल से गणेश पंडाल लगाया जा रहा है। ताजियेदारी करने वाले खलील खान कहते हैं कि उनके पिता ने करीब 40 साल पहले यहां ताजिये रखने की शुरुआत की थी। अब बगल में गणेश पंडाल भी है। शाम को दोनों ही पंडालों में श्रद्धालु जुटते हैं। एक ओर जियारत तो दूसरी ओर आरती होती है। आसपास के लोग भी इसे सद्भाव की मिसाल मानते हैं।
कभी विवाद जैसी स्थिति नहीं आई
गणेशोत्सव की शुरुआत को आठ साल हुए हैं। बस्ती में 15-16 मुस्लिम परिवार भी रहते हैं। कभी विवाद नहीं होता है। सुबह और शाम को आरती में सैकड़ों लोग जुटते हैं। - अजय कुमार
गणेश पंडाल में भजन-कीर्तन होते रहते हैं। ताजिए के पंडाल में भी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। यह अच्छी बात है कि दोनों धर्मों ही लोग अपने-अपने धर्म को निभा रहे हैं। - राजकुमार सिंह
नुनिहाई में 40 साल से रह रहे हैं। एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदारी करते हैं। ऐसे में ताजिए के जुलूस में भी बहुत से हिंदू भाई हमारे
साथ करबला तक जाते हैं। - खलील खान
गणेशोत्सव की शुरुआत को आठ साल हुए हैं। बस्ती में 15-16 मुस्लिम परिवार भी रहते हैं। कभी विवाद नहीं होता है। सुबह और शाम को आरती में सैकड़ों लोग जुटते हैं। - अजय कुमार
गणेश पंडाल में भजन-कीर्तन होते रहते हैं। ताजिए के पंडाल में भी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। यह अच्छी बात है कि दोनों धर्मों ही लोग अपने-अपने धर्म को निभा रहे हैं। - राजकुमार सिंह
नुनिहाई में 40 साल से रह रहे हैं। एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदारी करते हैं। ऐसे में ताजिए के जुलूस में भी बहुत से हिंदू भाई हमारे
साथ करबला तक जाते हैं। - खलील खान
दरगाह मरकज साबरी से जुड़े हिंदू भी करते हैं जियारत
दरगाह मरकज साबरी से जुड़े हिंदू भी फूलों के ताजिए की जियारत करते हैं। मोहर्रम की दसवीं को शबील लगाकर शर्बत बांटते हैं। दरगाह के सचिव विजय कुमार जैन बताते हैं कि दरगाह के हिंदू जायरीन हर मोहर्रम में दसवीं की सुबह जियारत करने के लिए फूलों के ताजिए पर पहुंचते हैं। इनमें तरुण अरोड़ा साबरी, जय सिंह साबरी, उमेश चंदेल, करुण साबरी, गुरुप्यारी, अंजू सिंह, माया देवी, गायत्री देवी, पुरुषोत्तम साबरी आदि शामिल हैं।
दरगाह मरकज साबरी से जुड़े हिंदू भी फूलों के ताजिए की जियारत करते हैं। मोहर्रम की दसवीं को शबील लगाकर शर्बत बांटते हैं। दरगाह के सचिव विजय कुमार जैन बताते हैं कि दरगाह के हिंदू जायरीन हर मोहर्रम में दसवीं की सुबह जियारत करने के लिए फूलों के ताजिए पर पहुंचते हैं। इनमें तरुण अरोड़ा साबरी, जय सिंह साबरी, उमेश चंदेल, करुण साबरी, गुरुप्यारी, अंजू सिंह, माया देवी, गायत्री देवी, पुरुषोत्तम साबरी आदि शामिल हैं।