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उम्मीद का उजियारा: जूते का काम ठप हुआ तो बनाने लगे मास्क, शुरू किया व्यापार, लोगों को दिया रोजगार

Wed, 30 Dec 2020 11:00 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 30 Dec 2020 11:00 AM IST
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Motivational Story Of Business Person After Out Break Corona Virus
रमनप्रीत सेतिया, दीपांशी कटकरिया और राजेंद्र मगन - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में हिम्मत और धैर्य से मुसीबतों का सामना कर लॉयर्स कॉलोनी निवासी राजेंद्र मगन ने अपना नया कारोबार शुरू किया। राजेंद्र मगन का करीब 21 वर्ष पुराना जूते बनाने का काम था। कई शहरों में आपूर्ति करते थे। कई कंपनियों को भी माल भेजते थे। लॉकडाउन में लंबे समय के लिए फैक्टरी बंद हो गई। जमा जमाया काम एक झटके से बंद होना किसी सदमे से कम नहीं थे। यह हिम्मत न हारने का समय नहीं था। उन्होंने माहौल की जरूरत को समझते हुए मास्क बनाना शुरू किया। काम चलाने के लिए कई कंपनी और शोरूम संचालकों से संपर्क कर आपूर्ति शुरू कर दी। रोज हजारों की संख्या में माल भेजा। संकट से निकलते ही इस समय वे 30 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। 
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पहले होटलों में करते थे आपूर्ति, अब एप से लेते ऑर्डर
गैलाना रोड निवासी रमनप्रीत सेतिया पिछले 20 सालों से होटलों में पैक्ड खाने की आपूर्ति करते थे। अच्छा खासा काम चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन ने ऐसी गाज गिराई सब झटके से जमीं पर आ गया। पूरे परिवार की भी जिम्मेदारी थी। हिम्मत नहीं हारी और धैर्य से काम लिया। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान ही घरों पर किराने की आपूर्ति का काम शुरू किया। शुरुआत में वॉट्सएप और फोन पर ऑर्डर लिए। आलम यह है कि उन्होंने एप तैयार कर लिया है। इसी पर ऑर्डर लेकर आपूर्ति करते हैं। 
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पिता के ठप हो चुके कारोबार को आसमां पर पहुंचाया
हलवाई की बगीची निवासी दीपांशी कटकरिया के पिता का बरसों पुराना गोल्ड और स्टोन हैंडीक्राफ्ट का कारोबार है। लॉकडाउन में कारोबार को बड़ा झटका लगा। दूसरा काम तुरंत शुरू करना जोखिम से कम नहीं था। ऐसे में दीपांशी ने परंपरागत काम को आज के समय में ढाला। स्टोन हैंडीक्राफ्ट में बैंबू, लकड़ी आदि का काम कराकर उत्पाद बनाए। इसके लिए बाकायदा ब्रांडिंग पर ध्यान दिया। अलग से कारीगर और ब्रांडिंग के लिए लोगों को नियुक्त किया। प्रचार के लिए सोशल साइट पर पेज पर बनाया और लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाई।
 
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