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उम्मीद का उजियारा: लॉकडाउन से कारोबार में हुआ नुकसान, मेहनत से फिर पाया मुकाम

Sun, 27 Dec 2020 10:51 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 27 Dec 2020 10:51 AM IST
सार

  • 2020 की यादें कड़वी ज्यादा हैं और मीठी कम। पर फिर भी आशावान होना और सकारात्मक सोचना मनुष्य की प्रवृत्ति है। ऐसा भी नहीं है कि सब बुरा ही बुरा हुआ है। ऐसे समय जब अधिकांश यादों में कोरोना के कहर ने कैसे 2020 को बर्बाद किया- ये ही जिक्र आ रहा है तो हम आपसे ये पूछना चाहते हैं कि तमाम दिक्कतों के बाद भी यह जाता हुआ साल आपके लिए क्या अच्छा लेकर आया? अमर उजाला की इसी पहल के तहत कुछ लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं पढ़िए उनकी कहानियां...

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motivational stories of Businessperson who regained hard work and get success
अखिल, निशांत और निधि (क्रमश:) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चार माह के लॉकडाउन ने आगरा के अखिल, निशांत और निधि के स्थापित कारोबार को जमीं दिखा दी। परिवार की जिम्मेदारी और कभी न हार मानने की हिम्मत ने उनको एक बार फिर फर्श से अर्श पर खड़ा कर दिया। इस बार नए हौसले के साथ नए काम का आगाज किया। विश्वास के साथ किया गया कारोबार चल निकला। उन हजारों लोगों के लिए भी नजीर पेश कर दी, जो कुछ माह की परेशानी में हौसला हार चुके थे।

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ग्राहक आने हुए कम, तो ऑनलाइन शुरू किया कारोबार
घटिया निवासी अखिल मोहन मित्तल का करीब 48 वर्ष पुराना फर्नीचर का काम है। लॉकडाउन ने औरों की तरह कारोबार ठप कर दिया। लॉकडाउन खुला तो ग्राहकों की संख्या काफी कम थी। खर्च तक निकलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में अपने काम को ऑनलाइन लेकर आ गए। चीन के सामान को टक्कर देने के लिए वैसे ही डिजाइन का सामान बनाना शुरू कर दिया। अब 100 किमी के दायरे में कारोबार को फैला लिया है। टर्नओवर लगभग 25 लाख रुपये तक पहुंचा दिया है।

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निशांत ने इवेंट कंपनी से इंडस्ट्रियल टेप तक का सफर किया तय
कमला नगर निवासी निशांत जैन पिछले करीब एक दशक से विज्ञापन और इवेंट कंपनी का संचालन कर रहे थे। कोरोना ने जमे हुए कारोबार को ठप कर दिया। ऐसे में भविष्य पर संकट मंडराने लगा। परिवार की जिम्मेदारी अलग तनाव दे रही थी। इसके बावजूद हिम्मत हारे बिना इंडस्ट्रियल टेप का काम शुरू किया। बस इतना विश्वास था कि कोरोना काल में कारोबार चल सकता है। इसके लिए यूपीएसआईडीसी में इकाई स्थापित की। तीन माह में टर्नओवर एक करोड़ तक पहुंचा दिया है।

पति का कारोबार हुआ ठप, निधि ने शुरू किया आभूषण का काम
काला महल निवासी निधि गुप्ता के पति का कॉपर की चेन का कारोबार था। उनके काम से ही पूरे परिवार का पोषण होता था। चार माह में काम ठप हुआ तो संकट गहरा गया। ऐसे में निधि ने रक्षाबंधन पर राखी बनाने की शुरुआत की। बाजार से कम दामों पर बिक्री कर जगह बनाई। त्योहार निकला तो फिर स्थायी काम की समस्या आ गई। यह देख इमिटेशन आभूषण बनाने का काम शुरू कर लिया। उनके बनाए गए आभूषण की मांग कई जगह से आने लगी है। 
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