फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   moharram

मोहर्रम: घरों में ही हो रही कुरान की तिलावत

Fri, 28 Aug 2020 10:42 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2020 10:42 PM IST
विज्ञापन
moharram
कटरा पुलिस चौकी के पीछे ताजिया रखे जाने वाला चबूतरा - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। कोरोना संक्रमण का असर मुहर्रम पर भी पड़ा है। सामाजिक दूरी के चलते इस बार इमामबाड़े और सार्वजनिक स्थानों पर मजलिसें नहीं हो रही हैं। घरों में रहकर ही जिक्र-ए-हुसैन किया जा रहा है। बहुत से लोगों ने तो दस दिन के रोजे भी रखे हैं।
विज्ञापन

इमाम हुसैन और उनके खानदान की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। मुहर्रम की पहली तारीख से ही जिले में मजलिसों का दौर शुरू हो जाता है। सात तारीख को मेंहदी रखी जाती हैं और नौ तरीख को ताजिये लेकिन इस बार कोरोना की वजह से न ताजिये रखे और न ही अखाड़े हुए। बस, लोगों ने घरों पर ही फातिहा दिलाकर इस महामारी के खात्मे की दुआ की। वहीं घरों में जिक्र-ए-हुसैन और जिक्र-ए-करबला हुआ।
विज्ञापन

इसलिए मनाते हैं मुहर्रम
मुहर्रम की दस तारीख को हजरत इमाम-ए-हुसैन की शहादत हुई थी। उन्होंने दुनिया से जुल्म को मिटाने और इंसानियत का पैगाम लोगों तक पहुंचाने और दीन-ए-इस्लाम को बचाने के लिए खुद को कुर्बान कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

घरों में रखीं गई मेंहदी
इस बार मुहर्रम पर सार्वजनिक स्थानों पर न रखकर घरों में ही छोटी-छोटी मेंहदी बनाकर रखी गईं। इस दौरान फातिहा दिलाई गई। सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंदी होने के कारण भीड़ भी नहीं जुट रही है।
मुहर्रम इमाम हुसैन की याद दिलाता है। हर बार ताजियेदारी और अखाड़े होते थे। इस बार सार्वजनिक कार्यक्रम पर रोक है। कोरोना संक्रमण के चलते समाज के लोगों से मस्जिदों और इमामबाड़ों से दूरी बनाने की अपील की गई है।
बबलू मियां, सज्जादानशीन बड़ी खानकाह
मुहर्रम पर घरों में कुरान की तिलरवत करने की अपील की गई है। घरों में ही मजलिसें करने को कहा गया है। इमाम हुसैन की याद में समाज के लोगों ने इस बार भी रोजे रखे हैं। ताजियेदारी और अखाड़े नहीं होनेे का मलाल भी है।
हाशिम जमाल, सज्जादानशीन छोटी खानकाह
अलम और मजलिसों को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं है। कोरोना संक्रमण के चलते गाइड लाइन का पालन हो रहा है। घरों में कुरान की तिलावत और मजलिसें करके समाज के लोग इमाम हुसैन की शहादत याद कर रहे हैं।

खुर्शीद अनवर जौहरी, बाटा वाली गली
इस बार नहीं मिला काम
ताजिया बनाने वाले कृष्णा टाकीज रोड निवासी मोहम्मद बली कहते हैं कि कोरोना संक्रमण के चलते इस बार उन्हें काम नहीं मिला हे। वैसे मुहर्रम पर दो महीने पहले से ही ताजिये बनाने का काम शुरू हो जाता था। सबसे ऊंचा ताजिया बनवाने की होड़ सी रहती थी। इस बार सब कुछ बदला हुआ सा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed