UP: सही सलामत भेजा था ये क्या हो गया...चीन से आया मर्चेंट नेवी के चीफ इंजीनियर का शव, पत्नी देखते ही चीख पड़ी
आगरा के रहने वाले मरीन इंजीनियर अनिल कुमार श्रीवास्तव मर्चेंट नेवी में बतौर चीफ इंजीनियर चीन में अपनी सेवाएं दे रहे थे, 12 जून को उनकी मृत्यु हो गई थी। उनका शव दिल्ली लाया गया। यहां से दोपहर को शव आगरा में उनके आवास पर पहुंच गया।
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सही सलामत भेजा था तुम्हें, ऐसा क्या हुआ जो तुम आंखें नहीं खोल रहे, एक बार मुझे पुकार दो, आंखें तो खोल दो, बच्चों की तरफ देख लो, हमें छोड़कर क्यों चले गए...। इंतजार के 25 दिन बाद मर्चेंट नेवी इंजीनियर अनिल कुमार का शव रविवार को आवास पर आया तो पत्नी अंजू लता ये कहते हुए चीख पड़ीं। आखों से आंसू झर-झर बहने लगे। कभी वो पति के माथे पर हाथ फेरतीं तो कभी दुपट्टे से हवा करने लगतीं। रोती मां की वेदना तो और भी करुण थी, आसपास मौजूद लोग भी आंखें नम होने से नहीं रोक सके।
चाणक्यपुरी, जगदीशपुरा निवासी इंजीनियर अनिल कुमार एक शिपिंग कंपनी में चीफ इंजीनियर थे। 12 जून को काम के दौरान उनकी हालत बिगड़ी और अस्पताल में मौत हो गई। पत्नी अंजू लता शिक्षिका हैं। घर में बेटा अक्षतराज, बेटी आदिरिका और मां रामकिशोरी हैं। अंजू लता पति का शव चीन से भारत लाने के लिए प्रयासरत थीं। हर पल प्रार्थना और मनुहार कर रही थीं। चीन सरकार की बंदिशों की वजह से उन्हें काफी दिक्कत हुई। वह खुद बुजुर्ग सास और मासूम बच्चों की हिम्मत बांधे हुए थीं। अपने आंसू रोककर तीनों को संभाल रही थीं।
उधर, कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रविवार को चीन से दिल्ली एयरपोर्ट और दोपहर में 12:45 बजे एंबुलेंस से चाणक्यपुरी स्थित आवास पर शव लाया गया। एंबुलेंस का सायरन सुनते ही पत्नी, बेटा, बेटी दौड़ पड़े। ताबूत देखकर परिवार में चीत्कार मच गया। पत्नी हाथ जोड़कर विनती करने लगीं कि एक बार चेहरा दिखा दो। मगर, पुलिस पहले पोस्टमार्टम गृह पर शव को लेकर गई। शाम को 4:15 बजे शव को निवास पर लाया गया तो अंजू लता बेहोश हो गर्ईं। चेहरे पर पानी डालकर होश में लाया गया। मां का भी हाल बेहाल था। वह बेटे के शरीर से लिपट गईं। बेटा और बेटी हाथ जोड़े हुए दहाड़े मारकर रोने लगे।
चीन सरकार पर प्रताड़ना का आरोप
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी पहुंचे। उन्हें अंजू लता ने बताया कि चीन सरकार ने कोई सहयोग नहीं किया। पति का पार्थिव शरीर आने में 25 दिन लग गए। कंपनी ने पोस्टमार्टम नहीं कराया। वह जब गए थे तब पूरी तरह फिट थे। हर बार जाने से पहले मेडिकल कराया जाता था। फिर ऐसा क्या हुआ जो उनकी मौत हो गई। उनका सामान भी कागजी प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से रुका है। चीन सरकार की प्रताड़ना के कारण इतना लंबा इंतजार करना पड़ा। परिवार के करीबी सुरेंद्र अरेला ने बताया कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लगा। दूतावास में लगातार संपर्क करने के बाद प्रयास सफल हुए।
डाक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
अनिल कुमार की पार्थिव देह आने के दौरान रविवार सुबह ही थाना जगदीशपुरा के प्रभारी निरीक्षक आनंदवीर सिंह फोर्स के साथ पहुंच गए। पुलिस ने सबसे पहले पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया है। फॉरेंसिक टीम के साथ वीडियोग्राफी कराई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बेटा बोला, पापा बता रहे थे सीने में दर्द
बेटा अक्षतराज पिता का पार्थिव शरीर आने पर दहाड़े मारकर रो रहा था। परिवार के लोगों ने बेटे से ही अंतिम संस्कार की रस्में अदा कराईं। बेटे का कहना था कि आखिरी बार पिता से फोन पर बात की थी। वह अपने सीने में दर्द बता रहे थे। इसके बाद फोन कट गया। उनके साथ क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला।
सेना में थे पिता, इंग्लैंड में की पढ़ाई
अनिल की बहन संगीता अशोक नगर में रहती हैं। उन्होंने बताया कि बड़े भाई मनोज कन्नौज में रहते हैं। अनिल छोटे थे। पिता स्वामी प्रसाद सेना में थे। बचपन में ही पिता की मौत हो गई थी। मां राम किशोरी स्वास्थ्य विभाग में नर्स थीं। अनिल ने दसवीं, बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद पॉलिटेक्निक किया। इसके बाद मुंबई जाकर मर्चेंट नेवी का कोर्स किया। बाद में एक कंपनी में भर्ती हो गए। इंग्लैंड जाकर अनिल ने पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियर ने दोस्तों संग लगाया था पौधा
अनिल के पार्थिव शरीर के आने की जानकारी पर दोस्त हरिओम कुलश्रेष्ठ और डाॅ. श्रीकांत कुलश्रेष्ठ भी आए थे। उनका कहना था कि अनिल जब भी घर आते थे, उनसे मिलते थे। पार्क में जाकर पौधा लगाते थे। दोनों मित्र उनकी याद में चाणक्यपुरी में लगाए पौधे को भी देखने गए।
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