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मेडिकल बोर्ड भंग, प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे दिव्यांग
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मैनपुरी। चिकित्सकों की कमी के कारण जिला अस्पताल का मेडिकल बोर्ड भंग हो गया है। इस कारण जिले में दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। मौजूद समय में दिव्यांग प्रमाणपत्र के 1037 आवेदन लंबित हैं। प्रमाणपत्र के लिए प्रतिदिन दिव्यांगजन सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
जिले में तैनात डॉ. पवन राजपूत, डॉ. अतुल जैन और डॉ. आदर्श सेंगर का विगत माह स्थानांतरण हो गया। उनके तबादले के बाद दिव्यांगता की जांच करने वाला मेडिकल बोर्ड भंग कर दिया गया है। इससे दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए दिव्यांगों को दिक्कत हो रही है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, 1037 आवेदन ऑनलाइन किए गए हैं। यह प्रमाणपत्र लंबित हैं। वर्तमान में बोर्ड का गठन न होने के कारण दिव्यांगों ने आवेदन करना भी बंद कर दिया है। ऐसे में कई दिव्यांग प्रमाणपत्र के अभाव में नौकरी के लिए भी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
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समेकित शिक्षा के तहत दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके लिए प्रमाणपत्र जरूरी है। जिले में दिव्यांगता प्रमाणपत्र न बनने के कारण छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। छात्र-छात्राओं के हित को देखते हुए शीघ्र मेडिकल बोर्ड का गठन कराया जाए।
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रणधीर बहादुर सिंह जिला समन्वयक समेकित शिक्षा
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पिछले एक माह से दिव्यांग सीएमओ कार्यालय के प्रति सोमवार को चक्कर काट रहे हैं। हालांकि मेडिकल बोर्ड गठित न होने के कारण प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं। इससे दिव्यांगजनों को सरकारी आवास, शौचालय आदि जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला प्रशासन को शीघ्र मेडिकल बोर्ड का गठन करना चाहिए।
राममोहन मिश्रा, जिलाध्यक्ष भाजपा दिव्यांग समिति
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जिले से हाल ही में 13 चिकित्सकों का स्थानांतरण हुआ है। मेडिकल बोर्ड में शामिल हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन के स्थानांतरण के बाद बोर्ड भंग हो गया है। मंडलीय संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक को पत्र भेजकर चिकित्सकों की मांग की गई है। शीघ्र ही बोर्ड का गठन कर प्रमाणपत्र जारी कराए जाएंगे।
डॉ.पीपी सिंह, सीएमओ
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जिले में तैनात डॉ. पवन राजपूत, डॉ. अतुल जैन और डॉ. आदर्श सेंगर का विगत माह स्थानांतरण हो गया। उनके तबादले के बाद दिव्यांगता की जांच करने वाला मेडिकल बोर्ड भंग कर दिया गया है। इससे दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए दिव्यांगों को दिक्कत हो रही है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, 1037 आवेदन ऑनलाइन किए गए हैं। यह प्रमाणपत्र लंबित हैं। वर्तमान में बोर्ड का गठन न होने के कारण दिव्यांगों ने आवेदन करना भी बंद कर दिया है। ऐसे में कई दिव्यांग प्रमाणपत्र के अभाव में नौकरी के लिए भी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
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समेकित शिक्षा के तहत दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके लिए प्रमाणपत्र जरूरी है। जिले में दिव्यांगता प्रमाणपत्र न बनने के कारण छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। छात्र-छात्राओं के हित को देखते हुए शीघ्र मेडिकल बोर्ड का गठन कराया जाए।
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रणधीर बहादुर सिंह जिला समन्वयक समेकित शिक्षा
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पिछले एक माह से दिव्यांग सीएमओ कार्यालय के प्रति सोमवार को चक्कर काट रहे हैं। हालांकि मेडिकल बोर्ड गठित न होने के कारण प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं। इससे दिव्यांगजनों को सरकारी आवास, शौचालय आदि जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला प्रशासन को शीघ्र मेडिकल बोर्ड का गठन करना चाहिए।
राममोहन मिश्रा, जिलाध्यक्ष भाजपा दिव्यांग समिति
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जिले से हाल ही में 13 चिकित्सकों का स्थानांतरण हुआ है। मेडिकल बोर्ड में शामिल हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन के स्थानांतरण के बाद बोर्ड भंग हो गया है। मंडलीय संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक को पत्र भेजकर चिकित्सकों की मांग की गई है। शीघ्र ही बोर्ड का गठन कर प्रमाणपत्र जारी कराए जाएंगे।
डॉ.पीपी सिंह, सीएमओ