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मथुरा: रंगनाथ मंदिर में मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
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मथुरा। वृंदावन स्थित श्री रंगनाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव के अवसर पर अभिषेक करते ?
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन। दक्षिण शैली के श्री रंगनाथ मंदिर में मंगलवार की रात कृष्ण जन्मोत्सव वैदिक परंपरानुसार के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी पर्व पर मंदिर परिसर में आकर्षक रंगोली सजाई गईं, वहीं हरे पत्तों, विभिन्न प्रकार के फूलों और विद्युत लाइटों से सजाया गया। भक्तों को कोरोना गाइडलाइंस के अनुरूप ही महाभिषेक के दर्शन सुलभ हुए।
श्री रंगमंदिर में वैदिक परंपरानुसार नित्योत्सव आयोजित होते हैं। मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र व अष्टमी तिथि का सुयोग बनने पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शुभ मुहूर्त में श्री लड्डू गोपाल जी का महाभिषेक षोडशोपचार पद्धति से पूजा-अर्चना के उपरांत शुरू किया गया। गो दुग्ध, दही, शर्करा, मधु, गौ घृत, इत्र आदि से अभिषेक हुआ।
वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा वैदिक ऋचाओं का सस्वर पाठ के बीच सर्वांग चंदन लेपन कर सहस्त्राभिषेक किया गया। तदोपरांत ठाकुरजी का विशेष शृंगार धारण करा कर कुंभ आरती, दूध अर्पित कर भक्तों ने भगवान को झूला झुलाया। भगवान के अभिषेक के बाद उनके जन्म की खुशी में बधाई गाकर नृत्य भी किया। मंदिर के महंत स्वामी गोवर्द्धन रंगाचार्य महाराज, स्वामी रघुनाथ, स्वामी यतिराज, स्वामी रंगा, चौबी स्वामी, अनघा श्री निवासन, चक्रपाणि मिश्रा, शरद शर्मा, तिरुपति राव, कन्हैया, पार्थ सारथी थे।
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श्री रंगमंदिर में वैदिक परंपरानुसार नित्योत्सव आयोजित होते हैं। मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र व अष्टमी तिथि का सुयोग बनने पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शुभ मुहूर्त में श्री लड्डू गोपाल जी का महाभिषेक षोडशोपचार पद्धति से पूजा-अर्चना के उपरांत शुरू किया गया। गो दुग्ध, दही, शर्करा, मधु, गौ घृत, इत्र आदि से अभिषेक हुआ।
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वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा वैदिक ऋचाओं का सस्वर पाठ के बीच सर्वांग चंदन लेपन कर सहस्त्राभिषेक किया गया। तदोपरांत ठाकुरजी का विशेष शृंगार धारण करा कर कुंभ आरती, दूध अर्पित कर भक्तों ने भगवान को झूला झुलाया। भगवान के अभिषेक के बाद उनके जन्म की खुशी में बधाई गाकर नृत्य भी किया। मंदिर के महंत स्वामी गोवर्द्धन रंगाचार्य महाराज, स्वामी रघुनाथ, स्वामी यतिराज, स्वामी रंगा, चौबी स्वामी, अनघा श्री निवासन, चक्रपाणि मिश्रा, शरद शर्मा, तिरुपति राव, कन्हैया, पार्थ सारथी थे।
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