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पंचतत्व में विलीन 'पितामह': रो पड़ा मथुरा, हर आम-ओ-खास बोला, अटल जी लौटकर आना

Fri, 17 Aug 2018 07:24 PM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 17 Aug 2018 07:24 PM IST
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Mathura people pay homage to Atal Bihari Vajpayee
पंचतत्व में विलीन हुए अटल बिहारी वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मथुरा के लोगों से खासा लगाव था। ब्रज में उनके निकटतम लोगों की फेहरिस्त तो बड़ी लंबी है। शायद कोई इलाका ही ऐसा होगा, जहां सियासत के युग पुरुष न घूमे हों। 
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान में तो लंबे समय तक आना जाना लगा रहा। दीनदयाल धाम के 23 साल तक अध्यक्ष रहे अटल जी। शुक्रवार तो जब उन्हें अंतिम विदाई दी गई तो हर आंख नम थी। लोग आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे। हर जुबां पर बस एक ही बात, अटल जी लौटकर आना।
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होली गेट चौराहे के रहने वाले सुमित खंडेलवाल ने कहा कि अटल जी ने साफ सियासत की नींव रखी थी। उन जैसा न कोई हुआ है और न ही होगा। यहां मौजूद रोहित, पिंकू, दुष्यंत, हरनाम और विपुल ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए अटल जैसे शख्स को वापस आना होगा। 
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अटल जी के जाने का दुख

65 साल के रामकिशोर ने कहा कि बुढ़ापा आ गया। जाने कितने बड़े बड़े लोग चले गए। मगर अटल जी के जाने का दुख हर किसी को है। वो किसी पार्टी के नहीं बल्कि हर किसी के थे। मथुरा में जब भी आते तो पूरा शहर घूम लेते थे। रामकिशोर बोले, अटल एक संत पुरुष थे। वो वापस जरूर आएंगे। 

कृष्णा नगर की हर दुकान और पान के खोखे पर खड़े लोग टीवी पर अटल जी की अंतिम विदाई देख रहे थे। हर किसी की आंख नम थी। बीच बीच में भारत माता के जयकारे भी गूंजने लगते थे। कुलदीप चतुर्वेदी, श्याम खंडेलवाल और विपिन अग्रवाल ने कहा कि अटल जी की वह कविता सच साबित होगी, जिसमें उन्होंने कहा है...मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं। 

कलक्ट्रेट के आसपास का बाजार भी टीवी पर लोग अटल जी की अंतिम विदाई देख रहे थे। यहां मौजूद लोग मथुरा से जुड़ी अटल जी की यादों साझा रहे थे। कोई कहता अटल जी को मथुरा की ठंडाई बड़ी पसंद आती थी। रबड़ी और कचौड़ी भी पसंद थी। कैलाश गुप्ता, प्रेमपाल, नागेंद्र और उमेश ने कहा कि सियासत में ऐसे ही लोग हों देश का भला हो सकता है। अंतिम विदाई को देख कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए थे।     

'नगला चंद्रभान तीर्थ से कम नहीं'

पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान में बने दीनदयाल धाम के 23 साल तक अध्यक्ष रहे। जब भी वह नगला चंद्रभान आते थे तब सभी से एक ही बात कहते कि पंडित जी का गांव मेरे लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। नगला चंद्रभान निवासी रमाशंकर पचौरी का कहना है कि जब भी अटल जी दीनदयाल धाम पर आते थे तो लोग उनसे मुलाकात करने जाते। 

अटल जी पंडित जी की झोपड़ी का फोटो देखकर कहते थे कि इस झोपड़ी में लाख कोठियों से ज्यादा ताकत है। यह कोठी उन पंडित जी की है, जिन्होंने देश की सियासत को एक नया रंग दिया था। वाजपेयी जी कहते थे कि युवा वर्ग को उनसे सीख लेने की जरूरत है। अटल जी ने नगला चंद्रभान में हुई सभा में कहा था कि जिस देश पंडित जी के आदर्शों को अपना लेगा उस दिन भेदभाव पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।  
 
एक बार में ही पहचान लिया था अपने साथी को 

राधा कृष्ण खंडेलवाल अटल जी के पुराने साथी रहे हैं। कानपुर में दोनों पढ़े भी एक ही कॉलेज में थे। राधा कृष्ण खंडेलवाल का कहना है कि जब अटल जी चुनाव लड़ने मथुरा आए थे तब उन्हें देखकर एक बार में ही पहचान लिया और अपनी गाड़ी में बैठा लिया। उन्होंने कहा भी कि वो बस से आ जाएंगे लेकिन अटल जी उन्हें अपनी कार में बैठाकर लोकसभा क्षेत्र में गए।
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