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राधा के बरसाना के बाद अब कान्हा के नंदगांव में देखिए लठामार होली का उल्लास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नंदगांव (मथुरा)
Updated Mon, 26 Feb 2018 11:15 AM IST
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लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा में बरसाना की लठामार होली के अगले दिन नंदगांव में लठामार होली का आनंद बरसा। अबीर गुलाल, होली के गीतों के बीच हुरियारिनों की लाठियों के तड़तड़ाहट ने फिजां में होली की मस्ती घोल दी।
बरसाना की लठामार होली के अगले दिन यहां सखी स्वरूप ग्वाल होली का नंदगांव में फगुआ मांगने आए। हुरियारे ढालों को लेकर नंदगांव की गलियों में लाठियां खाने को लालायित थे। हुरियारिनों ने प्रेम पगी लाठियों से उनका स्वागत किया।
दोपहर करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे यशोदा कुंड पर राधा स्वरूप पताका को लिए यशोदा कुंड पहुंचे। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। हंसी-ठिठोली करते हुए हुरियारे नंदभवन पहुंचे यहां उन्होंने नंदबाबा से शिकायत की कि नंदगांव के हुरियारे बरसाने में बिना फगुआ दिए लौट आए थे।
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बरसाना की लठामार होली के अगले दिन यहां सखी स्वरूप ग्वाल होली का नंदगांव में फगुआ मांगने आए। हुरियारे ढालों को लेकर नंदगांव की गलियों में लाठियां खाने को लालायित थे। हुरियारिनों ने प्रेम पगी लाठियों से उनका स्वागत किया।
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दोपहर करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे यशोदा कुंड पर राधा स्वरूप पताका को लिए यशोदा कुंड पहुंचे। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। हंसी-ठिठोली करते हुए हुरियारे नंदभवन पहुंचे यहां उन्होंने नंदबाबा से शिकायत की कि नंदगांव के हुरियारे बरसाने में बिना फगुआ दिए लौट आए थे।
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लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
यहां पहले से ही तैयार नंदगांव के ग्वालों ने बरसाना के हुरियारों पर पिचकारी, बाल्टियों रंग डालकर सराबोर कर दिया। कृष्ण-बलराम के विग्रहों के सामने संयुक्त समाज गायन किया।
सायं रंगीली चौक पर हजारों की संख्या में हुरियारे और हुरियारिनें एकत्रित हो र्गइं। इसके बाद वे नृत्य व गायन प्रस्तुत करते हैं। लोकगीतों की प्रस्तुति, अलौकिक लीलाओं का आयोजन किया।
यहीं पर हुरियारिनें प्रेम भरी लाठियां बरसाना शुरू कर देती है। इस मार में छिपे प्यार से हुरियारे मस्त हो जाते है। इस अदभुत लीला को देखने के लिए छतों पर लोगों का हुजूम लग गया।
सायं रंगीली चौक पर हजारों की संख्या में हुरियारे और हुरियारिनें एकत्रित हो र्गइं। इसके बाद वे नृत्य व गायन प्रस्तुत करते हैं। लोकगीतों की प्रस्तुति, अलौकिक लीलाओं का आयोजन किया।
यहीं पर हुरियारिनें प्रेम भरी लाठियां बरसाना शुरू कर देती है। इस मार में छिपे प्यार से हुरियारे मस्त हो जाते है। इस अदभुत लीला को देखने के लिए छतों पर लोगों का हुजूम लग गया।