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मेरी पहचान मेरी लाडलीः ससुराल से लौटी बेटी को मां के संबल ने दिलाई नई पहचान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
Updated Mon, 15 Jan 2018 12:15 PM IST
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अवनिका गौतम मां के साथ
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शादी के बाद खुशहाल विवाहित जीवन की आस लिए ससुराल पहुंची बेटी को सम्मान नहीं मिल पाया तो बेटी घर वापस लौट आई। ऐसे विषम समय में एक मां अपनी बेटी का सहारा बनीं। बेटी ने भी कुछ कर दिखाने की ठानी। आज वही बेटी दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी है।
वृंदावन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता डा. लक्ष्मी गौतम की बेटी अवनिका गौतम का विवाह फरवरी 2008 में हुआ था लेकिन अवनिका का वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं रहा। तब अवनिका ने न्यायिक सेवा के क्षेत्र में जाने का मन बनाया।
अवनिका ने एमएससी केमिस्ट्री, एमफिल, एलएलएम की पढ़ाई आगरा कॉलेज से पूरी की। 2014 में झारखंड ज्यूडिशियल सर्विसेज की परीक्षा में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर 9वां स्थान प्राप्त किया।
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आज अवनिका ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ऑफ झारखंड के तहत रांची में अतिरिक्त मुंशिफ न्यायाधीश का पद पर कार्यरत हैं। वहीं, अवनिका की आठ साल की बेटी वृंदारिका भी मां और नानी के दिखाए पद चिन्हों पर चल कर पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही है।
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वृंदावन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता डा. लक्ष्मी गौतम की बेटी अवनिका गौतम का विवाह फरवरी 2008 में हुआ था लेकिन अवनिका का वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं रहा। तब अवनिका ने न्यायिक सेवा के क्षेत्र में जाने का मन बनाया।
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अवनिका ने एमएससी केमिस्ट्री, एमफिल, एलएलएम की पढ़ाई आगरा कॉलेज से पूरी की। 2014 में झारखंड ज्यूडिशियल सर्विसेज की परीक्षा में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर 9वां स्थान प्राप्त किया।
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आज अवनिका ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ऑफ झारखंड के तहत रांची में अतिरिक्त मुंशिफ न्यायाधीश का पद पर कार्यरत हैं। वहीं, अवनिका की आठ साल की बेटी वृंदारिका भी मां और नानी के दिखाए पद चिन्हों पर चल कर पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही है।