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‘मास्टर माइंडों’ ने मार दी कालिंदी
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 15 Mar 2015 01:42 AM IST
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यमुना ऐसे ही बदहाल नहीं हुई। भ्रष्टाचार के खेल में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत ने नदी के प्रतिबंधित दायरे में अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया। पुलिस शिकायत दर्ज होने के इंतजार में, प्रशासन आदेश के इंतजार में तो सिंचाई विभाग व आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के अधिकारी सहयोग न मिलने की बात कहकर अवैध निर्माणों को बढ़ावा देते रहे। इन सभी ‘मास्टर माइंडों’ ने मिलकर यमुना को नाला बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डिलिंग वाली प्रॉपर्टी को बचाने के लिए दो महीने में ही कुछ निर्माण स्थलों से यमुना की दूरी 45 मीटर दर्शा दी।
22 अप्रैल 2013 में जन सूचना अधिकार के तहत नहर विभाग से मऊ स्थित खसरा संख्या 276 पर हुए निर्माणों से यमुना की दूरी मांगी गई थी, जिसमें बताया गया था कि पुष्पांजलि हाइट्स, मंगलम एस्टेट, कल्याणी हाइट, जवाहर बाग-2 से यमुना की दूरी पांच मीटर बताई गई थी। लगभग दो महीने बाद इसी सवाल को लेकर डाली गई आरटीआई के जवाब में 12 जून 2013 को पुष्पांजलि हाइट्स से इसकी दूसरी 50 मीटर बताई गई। जबकि एडीए के नियम के मुताबिक, नदी के सौ मीटर दायरे में निर्माण नहीं हो सकता।
इनसेट
कोर्ट में देना होगा जवाब
यमुना मुक्तिकरण को लेकर मथुरा में लोग आंदोलन की तैयारी में हैं। वहीं यमुना को बचाने के लिए पर्यावरणविद डीके जोशी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दायर की है। वह इन सभी रिपोर्टों का हवाला देकर अधिकारियों की कारगुजारी खोलने की तैयारी में हैं।
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इनसेट
सिंचाई विभाग की ‘तकनीकी फांस’
वहीं एक दूसरे मामले में सिंचाई विभाग ने तकनीकी खेल कर अपने दामन को दागदार होने से बचा लिया है। मौजा मऊ मुस्तकिल में मंगलम एस्टेट एक्शटेंशन कालोनी के मानचित्र की स्वीकृति के लिए सिंचाई विभाग ने आंकड़ों की बाजीगरी करते हुए बताया कि यहां ग्राउंड लेवल 154.95 मीटर है। वहीं, इसकी तुलना पोइया घाट पर यमुना के एचएफएल (हाईफ्लड लेवल 154.92 मीटर) से 0.03 मीटर ऊंचा बताया। में यह आंकड़ा विभाग को बचा सकता है, लेकिन व्यवहारिक रूप में बाढ़ के दौरान यह ऊंचाई इतनी कम है कि पानी की एक लहर इससे कहीं ऊंची हो सकती है। भारत सरकार के राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को तीन भागों में विभाजित किया है। जहां कुछ सालों के अंतराल पर बाढ़ आती ही रहती है।
इनसेट
एक श्रेणी (जहां आठ से दस साल में बाढ़ आती है) : मथुरा, मुजफ्फर नगर, मेरठ
बी श्रेणी (जहां छह से सात साल में बाढ़ आती है) : अलीगढ़, आगरा, शाहजहांपुर, हमीरपुर
सी श्रेणी (जहां तीन से पांच साल में बाढ़ आती है) : बुलंदशहर
यमुना में इन सालों में आई बाढ़
1924, 1947, 1955, 1956, 1967, 1971, 1975, 1976, 1978, 1988, 1995, 2010
-----------
सिंचाई विभाग से यमुना के डूब क्षेत्र के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हाेंने जवाब नहीं दिया। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।
कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव, सचिव एडीए
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22 अप्रैल 2013 में जन सूचना अधिकार के तहत नहर विभाग से मऊ स्थित खसरा संख्या 276 पर हुए निर्माणों से यमुना की दूरी मांगी गई थी, जिसमें बताया गया था कि पुष्पांजलि हाइट्स, मंगलम एस्टेट, कल्याणी हाइट, जवाहर बाग-2 से यमुना की दूरी पांच मीटर बताई गई थी। लगभग दो महीने बाद इसी सवाल को लेकर डाली गई आरटीआई के जवाब में 12 जून 2013 को पुष्पांजलि हाइट्स से इसकी दूसरी 50 मीटर बताई गई। जबकि एडीए के नियम के मुताबिक, नदी के सौ मीटर दायरे में निर्माण नहीं हो सकता।
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कोर्ट में देना होगा जवाब
यमुना मुक्तिकरण को लेकर मथुरा में लोग आंदोलन की तैयारी में हैं। वहीं यमुना को बचाने के लिए पर्यावरणविद डीके जोशी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दायर की है। वह इन सभी रिपोर्टों का हवाला देकर अधिकारियों की कारगुजारी खोलने की तैयारी में हैं।
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सिंचाई विभाग की ‘तकनीकी फांस’
वहीं एक दूसरे मामले में सिंचाई विभाग ने तकनीकी खेल कर अपने दामन को दागदार होने से बचा लिया है। मौजा मऊ मुस्तकिल में मंगलम एस्टेट एक्शटेंशन कालोनी के मानचित्र की स्वीकृति के लिए सिंचाई विभाग ने आंकड़ों की बाजीगरी करते हुए बताया कि यहां ग्राउंड लेवल 154.95 मीटर है। वहीं, इसकी तुलना पोइया घाट पर यमुना के एचएफएल (हाईफ्लड लेवल 154.92 मीटर) से 0.03 मीटर ऊंचा बताया। में यह आंकड़ा विभाग को बचा सकता है, लेकिन व्यवहारिक रूप में बाढ़ के दौरान यह ऊंचाई इतनी कम है कि पानी की एक लहर इससे कहीं ऊंची हो सकती है। भारत सरकार के राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को तीन भागों में विभाजित किया है। जहां कुछ सालों के अंतराल पर बाढ़ आती ही रहती है।
इनसेट
एक श्रेणी (जहां आठ से दस साल में बाढ़ आती है) : मथुरा, मुजफ्फर नगर, मेरठ
बी श्रेणी (जहां छह से सात साल में बाढ़ आती है) : अलीगढ़, आगरा, शाहजहांपुर, हमीरपुर
सी श्रेणी (जहां तीन से पांच साल में बाढ़ आती है) : बुलंदशहर
यमुना में इन सालों में आई बाढ़
1924, 1947, 1955, 1956, 1967, 1971, 1975, 1976, 1978, 1988, 1995, 2010
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सिंचाई विभाग से यमुना के डूब क्षेत्र के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हाेंने जवाब नहीं दिया। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।
कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव, सचिव एडीए