फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Martyr Captain Shubham Gupta's mother cried after seeing the used items from his unit

बलिदानी कैप्टन शुभम: यादों भरा संदूक आया... एक-एक चीज को सीने से लगा मां बोलीं- मुझे तो मेरा बेटू चाहिए

Tue, 05 Dec 2023 10:22 AM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 05 Dec 2023 10:22 AM IST
सार

बलिदानी कैप्टन शुभम गुप्ता की यूनिट से आए उनके प्रयोग किए गए सामान को देख उनकी मां बिलख पड़ीं।  छोटे बेटे ने  मां को ढांढस बंधाया।
 

विज्ञापन
Martyr Captain Shubham Gupta's mother cried after seeing the used items from his unit
छोटे बेटे ने मां को ढांढस बंधाया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा लाल (कैप्टन शुभम गुप्ता) की जुदाई में मां की आंखें 12 दिन से रो-रोकर पथरा सा गईं थीं। सोमवार को राजोरी से बेटे की यादों से भरा संदूक आया तो उनकी आंखें फिर भीग गईं। बेटे की वर्दी, तस्वीर, कपड़ों आदि को सीने से लगाया, दुलारा, चूमा फिर दहाड़ मारकर रोने लगीं। बोलीं, मेरा शुभम कहां है, उसे क्यों नहीं लाए... मुझे तो मेरा बेटू चाहिए। मां की ऐसी करुण पुकार ने आसपास मौजूद हर शख्स की आंखों को नम कर दिया। छोटे बेटे ऋषभ मां को दिलासा देने में जुटे रहे।

विज्ञापन


राजोरी में 22 नवंबर को कैप्टन शुभम गुप्ता की शहादत हुई थी। घर में 12 दिन से गम के बादल हैं। नाते-रिश्तेदार, सेना के अधिकारी और आसपास के लाेग परिजन के साथ यादें साझा कर रहे हैं। बेटे के गम में मां पुष्पा गुप्ता की आंखों के आंसू सूख गए थे। वह एकटक बेटे की तस्वीर को ही ज्यादा समय निहारती रह रहीं थीं।
विज्ञापन


रविवार देर शाम राजोरी से सैन्य अधिकारी बलिदानी शुभम के प्रयोग किए जाने वाले सामानों से भरा संदूक लेकर घर पहुंचे। इसमें वर्दी, बैज, कैप, लैपटॉप समेत अन्य सामान देख वो बेटे के लिए रोने लगीं। वर्दी को सीने से लगातीं तो कभी बैज को चूमतीं।
विज्ञापन
विज्ञापन



बिलखते हुए सेना के अधिकारियों से बोलीं, मेरे बेटे को कहां छोड़ आए, उसे भी साथ लेते आते। बार-बार यही कहते हुए वो बेसुध भी हो जा रहीं थीं। छोटे बेटे ऋषभ ने मां के गले लगकर उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश की। कभी आंसू पोंछते तो कभी कहते भइया कहीं नहीं गए, वो हमारे दिल में हैं। ये दिलासा देने भर की कोशिश थी, लेकिन मां की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।

कोने में सुबके पिता, बोले- यादें संजो रहे
वहीं दूसरी ओर बेटे के सामान को देखकर कोने में सुबक रहे पिता बसंत गुप्ता के बमुश्किल बोल फूट रहे थे। खुद को संभालते हुए बोले, बेटे के जाने के बाद उसकी वीडियो, फोटो देखकर यादें संजो रहे हैं। दो-तीन दिन पहले शुभम के सेना के साथी ने दिवाली का फोटो भेजा था, जिसमें वो अपनी तैनाती स्थल पर मोमबत्ती जला रहे थे। दिवाली से पहले बेटे ने कहा था कि पिताजी छुट्टी पर आ रहा हूं और एक साथ सभी दिवाली मनाएंगे। हमें नहीं पता था कि फिर दोबारा बेटे को नहीं देख पाऊंगा।


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed