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कासगंज: मां गंगा में विसर्जित हुईं शहीद भागीरथ की अस्थियां, गूंजे भारत माता के जयकारे
Fri, 22 Feb 2019 04:36 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 22 Feb 2019 04:36 PM IST
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हरिपदी गंगा में विसर्जित हुईं शहीद की अस्थियां
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पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए धौलपुर के भागीरथ की अस्थियां शुक्रवार को तीर्थनगरी सोरों के हरिपदी कुंड में विसर्जित कराई गईं। इस दौरान हरिपदी के घाट भारत माता की जयकारों से गूंज उठे। शहीद भागीरथ की शहादत को नमन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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राजस्थान के धौलपुर के गांव जैतपुर निवासी 27 वर्षीय भागीरथ सिंह पुत्र परशुराम सीआरपीएफ में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। वो 12 फरवरी को छुट्टी के बाद वापस ड्यूटी पर गए थे, लेकिन 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हो गया। इसमें भागीरथ सहित 40 जवान शहीद हो गए थे।
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भागीरथ के परिजन सोरों तीर्थ को विशेष महत्व देते हैं। भागीरथ की शहादत के बाद उनकी अस्थियां मोक्षदायिनी गंगा के हरिपदी घाट पर लाई गईं। यहां पुरोहित पहले ही अस्थि विसर्जन की तैयारी कर चुके थे। अस्थियां लेकर शहीद के छोटे भाई बलवीर अपने चचेरे भाई के साथ सोरों पहुंचे।
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शहीद को नमन करने को उमड़ी भीड़
पुरोहित नीरज तिवारी ने विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ शहीद की अस्थियां हरिपदी के कुंड में विसर्जित कराईं। शहीद की शहादत को नमन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। नम आंखों से लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान गंगा घाट भारत माता के जयकारों से गूंजते रहे।
भागीरथ की शादी पांच पहले रंजना के साथ हुई थी। शहीद के दो मासूम बच्चे हैं। बड़ा बेटा विनय तीन वर्ष का और बेटी शिवांगी डेढ़ साल की है। परंपराओं के चलते मासूम विनय ने पिता की चिता को मुखाग्रि तो दे दी थी, लेकिन वो अस्थि विसर्जन करने सोरों हरिपदी घाट नहीं आ सका।
शहीद के परिजनों ने पुरोहितों को बताया कि बेटा काफी छोटा है। शहीद की विधवा पति की मौत के बाद पूरी तरह टूट चुकी हैं। न तो पत्नी अस्थि विसर्जन में आ सकीं और न ही मासूम बेटा। पुरोहित नीरज तिवारी ने बताया कि शहीद का चचेरा भाई जोगेंद्र भी साथ में था। जरूरी नहीं था कि मुखाग्रि देने वाला बेटा ही आता। भाइयों से पिंडदान कराया गया।
छोटा भाई बलवीर सिंह शहीद शहीद भागीरथ को नमन करते हुए गंगा घाट पर रो पड़ा। उसने पुरोहितों के समक्ष संकल्प लिया कि वो भाई की याद में देश सेवा करेगा। पुलिस अफसर बनने की तैयारी कर रहा है। पुलिस अफसर बनने के बाद आतंकवाद को खत्म कराने के लिए जंग लड़ेगा।
भागीरथ की शादी पांच पहले रंजना के साथ हुई थी। शहीद के दो मासूम बच्चे हैं। बड़ा बेटा विनय तीन वर्ष का और बेटी शिवांगी डेढ़ साल की है। परंपराओं के चलते मासूम विनय ने पिता की चिता को मुखाग्रि तो दे दी थी, लेकिन वो अस्थि विसर्जन करने सोरों हरिपदी घाट नहीं आ सका।
शहीद के परिजनों ने पुरोहितों को बताया कि बेटा काफी छोटा है। शहीद की विधवा पति की मौत के बाद पूरी तरह टूट चुकी हैं। न तो पत्नी अस्थि विसर्जन में आ सकीं और न ही मासूम बेटा। पुरोहित नीरज तिवारी ने बताया कि शहीद का चचेरा भाई जोगेंद्र भी साथ में था। जरूरी नहीं था कि मुखाग्रि देने वाला बेटा ही आता। भाइयों से पिंडदान कराया गया।
छोटा भाई बलवीर सिंह शहीद शहीद भागीरथ को नमन करते हुए गंगा घाट पर रो पड़ा। उसने पुरोहितों के समक्ष संकल्प लिया कि वो भाई की याद में देश सेवा करेगा। पुलिस अफसर बनने की तैयारी कर रहा है। पुलिस अफसर बनने के बाद आतंकवाद को खत्म कराने के लिए जंग लड़ेगा।