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कारगिल शहीद के पिता के साथ धोखाधड़ी
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 15 Jul 2015 01:36 AM IST
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आम आदमी तो छोड़िए भ्रष्ट सरकारी सिस्टम को शहीद के पिता के साथ धोखाधड़ी करने में भी शर्म नहीं आई। रिठौरी, खेरागढ़ निवासी कारगिल शहीद रामवीर सिंह के पिता भगवान सिंह को मृत दर्शाकर लेखपाल ने उनका खेत ही किसी अन्य के नाम कर दिया। इसका पता तब चला जब वह ओलावृष्टि की राहत राशि नहीं मिलने पर जानकारी करने तहसील पहुंचे। कर्मचारियों ने जब उनके खेत की वास्तविक स्थिति बताई तो उनके होश उड़ गए। अपनी जमीन हासिल करने के लिए वह अब अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं।
जिसके बेटे ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलि चढ़ा दी थी, उसी के पिता को अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मंगलवार को सदर तहसील पर रालोद के प्रदर्शन में सैकड़ों किसानों के बीच में खेरागढ़, रिठौरी के भगवान सिंह भी थे। अधिकांश किसान आलोवृष्टि से बर्बाद हुई फसल के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं भगवान सिंह अपनी लगभग एक हेक्टेयर कृषि भूमि को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन में आए।
भगवान सिंह का कहना है कि क्षेत्रीय लेखपाल विमल चंद्र जैन ने उन्हें मृत दर्शाकर उनकी जमीन को राजेंद्र सिंह, रामेश्वर, खेमकरन, गंगाराम व अन्य के नाम दर्ज करा दी है। जिसका अमल दरामद खतौनी पर इसी साल दो जुलाई को बना दिया गया। उनका कहना है कि ओलावृष्टि का मुआवजा न मिलने पर वह सात जुलाई को अपनी जमीन की नकल खतौनी निकलवाई। ओलावृष्टि की राहत राशि की सूची में भी उन्हें मृतक दर्शाया गया है। इसके बाद उन्होंने तहसील स्तर से लेकर जिलाधिकारी तक को पत्र लिख गुहार लगा, मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई। इस संबंध में वह प्रधानमंत्री तक को पत्र लिख चुके हैं।
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एसडीएम बोले, त्रुटिवश दर्ज हुए नाम
मामले में खेरागढ़ के एसडीएम राम सिंह गौतम का कहना है कि शहीद के पिता के साथ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि गलती से ऐसा हुआ है। उनका कहना है कि शहीद के पिता भगवान सिंह की खेत संख्या 383 है, जबकि उनके ही नामराशि की खेत संख्या 382 है। पिछले दिनों 382 भूखंड स्वामी भगवान सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी जमीन उनके ही परिजनों के नाम हो गई, मगर त्रुटिवश कागजों में भूमि संख्या 382 की जगह 383 चढ़ गई। शिकायतकर्ता ने जिन लोगों के नाम प्रार्थना पत्र में दिए हैं, वह भूमि संख्या 382 के स्वामी मृतक भगवान सिंह के परिजन हैं। शिकायत मिलने के बाद इस त्रुटि को ठीक करा दिया गया है। जो भूखंड जिसके नाम था, उसी के नाम है।
.. तो भगवान सिंह को न हो पाती जानकारी
अधिकारी अपने तर्क रख रहे हैं, मगर यदि ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों की मुआवजा राशि को लेकर शहीद के पिता भगवान सिंह सक्रिय न हुए होते तो शायद लंबे समय तक उन्हें पता ही नहीं चल पाता कि उनकी जमीन आखिर किसके नाम है। हालांकि अभी भी भगवान सिंह को उनकी जमीन के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई है। अगर ऐसा होता वह मंगलवार को रालोद के प्रदर्शन में शामिल न होते।
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जिसके बेटे ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलि चढ़ा दी थी, उसी के पिता को अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मंगलवार को सदर तहसील पर रालोद के प्रदर्शन में सैकड़ों किसानों के बीच में खेरागढ़, रिठौरी के भगवान सिंह भी थे। अधिकांश किसान आलोवृष्टि से बर्बाद हुई फसल के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं भगवान सिंह अपनी लगभग एक हेक्टेयर कृषि भूमि को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन में आए।
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भगवान सिंह का कहना है कि क्षेत्रीय लेखपाल विमल चंद्र जैन ने उन्हें मृत दर्शाकर उनकी जमीन को राजेंद्र सिंह, रामेश्वर, खेमकरन, गंगाराम व अन्य के नाम दर्ज करा दी है। जिसका अमल दरामद खतौनी पर इसी साल दो जुलाई को बना दिया गया। उनका कहना है कि ओलावृष्टि का मुआवजा न मिलने पर वह सात जुलाई को अपनी जमीन की नकल खतौनी निकलवाई। ओलावृष्टि की राहत राशि की सूची में भी उन्हें मृतक दर्शाया गया है। इसके बाद उन्होंने तहसील स्तर से लेकर जिलाधिकारी तक को पत्र लिख गुहार लगा, मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई। इस संबंध में वह प्रधानमंत्री तक को पत्र लिख चुके हैं।
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एसडीएम बोले, त्रुटिवश दर्ज हुए नाम
मामले में खेरागढ़ के एसडीएम राम सिंह गौतम का कहना है कि शहीद के पिता के साथ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि गलती से ऐसा हुआ है। उनका कहना है कि शहीद के पिता भगवान सिंह की खेत संख्या 383 है, जबकि उनके ही नामराशि की खेत संख्या 382 है। पिछले दिनों 382 भूखंड स्वामी भगवान सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी जमीन उनके ही परिजनों के नाम हो गई, मगर त्रुटिवश कागजों में भूमि संख्या 382 की जगह 383 चढ़ गई। शिकायतकर्ता ने जिन लोगों के नाम प्रार्थना पत्र में दिए हैं, वह भूमि संख्या 382 के स्वामी मृतक भगवान सिंह के परिजन हैं। शिकायत मिलने के बाद इस त्रुटि को ठीक करा दिया गया है। जो भूखंड जिसके नाम था, उसी के नाम है।
.. तो भगवान सिंह को न हो पाती जानकारी
अधिकारी अपने तर्क रख रहे हैं, मगर यदि ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों की मुआवजा राशि को लेकर शहीद के पिता भगवान सिंह सक्रिय न हुए होते तो शायद लंबे समय तक उन्हें पता ही नहीं चल पाता कि उनकी जमीन आखिर किसके नाम है। हालांकि अभी भी भगवान सिंह को उनकी जमीन के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई है। अगर ऐसा होता वह मंगलवार को रालोद के प्रदर्शन में शामिल न होते।