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और भी अफसरों का बंधेगा बोरिया बिस्तर

Wed, 26 Apr 2017 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
अमर उजाला ब्यूरो आगरा। Updated Wed, 26 Apr 2017 11:43 PM IST
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many transfer of police department as soon
भाजपा नेताओं ने आगरा से लखनऊ तक की अधिकारियों की घेराबंदी - फोटो : file photo
एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह के बाद तीन-चार और पुलिस अफसरों का जल्द ही ट्रांसफर हो सकता है। भाजपा नेताओं ने इनके नाम भी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लिखकर दे दिए हैं। इनमें एक सीओ और एक इंस्पेक्टर है जबकि दो दरोगा हैं।  इनके अलावा एक आईपीएस अफसर भी है। भाजपा नेता चाहते हैं कि इस मामले में पुलिस अफसरों को ऐसा सबक दिया जाए जो लंबे समय तक याद रहे।
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बता दें, फतेहपुर सीकरी में पुलिस ने दो युवकों की तहरीर पर 20 अप्रैल को भाजपा और संघ पदाधिकारियों के खिलाफ डकैती और जानलेवा हमले की धाराओं में केस दर्ज कर लिया था। इस केस की वापसी के लिए 22 अप्रैल को भाजपा और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने फतेहपुर सीकरी थाना पर धरना प्रदर्शन किया। तभी बवाल हो गया। सीओ अछनेरा को थप्पड़ जड़ दिया गया। पुलिस ने पांच लोग हिरासत में ले रखे थे। उन्हें आगरा के सदर बाजार थाना भेज दिया। यहां भी कार्यकर्ता पहुंच गए। इसके बाद जमकर बवाल हुआ। पुलिस ने आरोप लगाया कि दरोगा की बाइक फूंकी गई, रिवाल्वर लूटी गई, हवालात तोड़ने की कोशिश की गई। मौके से नौ लोग हिरासत में लिए        गए। पुलिस ने दोनों मामलों में संगीन धाराओं में केस दर्ज किए। हिरासत में लिए 14 लोग जेल भेज दिए गए। शुरू में संघ और भाजपा नेता शांत रहे लेकिन 25 अप्रैल को पुलिस के खिलाफ खुलकर सामने आ गए। अब एक ही जिद पकड़ ली है कि अफसरों पर कार्रवाई करवानी है। इसी को लेकर आगरा में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से संगठन के नेता मिले तो लखनऊ में संासद राम शंकर कठेरिया और आठ विधायक  सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले। भाजपा नेताओं की माने तो दोनों जगह उनकी बात सुनी गई। एसएसपी हटाए जा चुके हैं। और भी अफसरों पर गाज गिर सकती है।
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तीन सवालों का जवाब नहीं दे पाए अधिकारी
1. सीकरी में रंजिश के मामले में संघ और भाजपा नेताओं के खिलाफ डकैती का केस कैसे दर्ज कर लिया गया।
2. जेल भेजे गए कार्यकर्ताओं की मेडिकल के बाद छत्ता थाना ले जाकर पिटाई क्यों की गई।
3. सदर बाजार में दरोगा का रिवाल्वर लूटा गया तो यह झाड़ियों से बरामद कैसे हो गया।

मुख्यमंत्री तक को करना पड़ रहा है फोन
आगरा। इस पूरे मामले में तीन गलतियों से अधिकारियों की गर्दन फंसी है। पहली गलती फतेहपुर सीकरी में भाजपा और संघ नेताओं के खिलाफ दर्ज मामला बताया जा रहा है। पुलिस ने सब्जी विक्रेता मुवीन और रिजवान की तहरीर पर यह केस दर्ज किया था। इसमें डकैती और जानलेवा हमले की धाराएं लगाईं, जबकि पुलिस को मालूम था कि दोनों पक्षों में पहले से रंजिश है। झगड़ा भी हो चुका है। इसके बावजूद बगैर जांच के केस दर्ज कर लिया। भाजपा नेताओं ने दो उदाहरण रखे। एक  सदर में चोरी का था। इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पीड़ित को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से फोन कराना पड़ा था। दूसरा, हरीपर्वत में महाराष्ट्र के भाजपा नेता संतोष कुमार की जेब काट लिए जाने का था। इसकी एफआईआर के लिए संतोष को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस से फोन कराना पड़ा था। भाजपा नेताओं ने केशव प्रसाद मौर्य से कहा कि  आगरा की पुलिस चोरी और जेब काटे जाने तक की रिपोर्ट दर्ज नहीं करती, उसने सीकरी में संघ और भाजपा नेताओं के खिलाफ डकैती का केस तहरीर मिलने के पांच मिनट में लिख लिया। भाजपा नेताओं ने दूसरी गलती पकड़ी है जेल भेजे गए कार्यकर्ताओं की पिटाई के साक्ष्य जुटाकर। अभी तीन कार्यकर्ताओं का ही फिर से मेडिकल परीक्षण कराया गया है। इसमें दो की हड्डी टूटी मिली है। जेल भेजे जाने से पहले कराए गए मेडिकल में कोई चोट नहीं थी। भाजपा नेताओं का आरोप है कि मेडिकल कराने के बाद उन्हें छत्ता थाने में ले जाकर पीटा गया था। तीसरी गलती दरोगा से रिवाल्वर लूट की कहानी बताई गई है। भाजपा नेताओं ने डिप्टी सीएम के सामने ही पुलिस अफसरों से सवाल किया कि अगर रिवाल्वर लूटा गया था तो यह झाड़ियों में कैसे मिल गया? पुलिस पर इसका जवाब नहीं है।
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