मनकामेश्वर मंदिर डकैती केस: दस साल बाद आया फैसला, लूट के आरोपों में फंसे रामलीला कमेटी के पदाधिकारी बरी
अप्रैल 2013 में रामलीला कमेटी पर मनकामेश्वर मंदिर के निकट स्थित बारहद्वारी में सभा करते हुए अवैध कब्जा करने और बारहद्वारी के हॉल में अवैध दरवाजे निकाल लेने का आरोप लगाया था। इस मामले में विवाद बढ़ा और रामलीला कमेटी के ऊपर डकैती का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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आगरा की प्रमुख रामलीला कमेटी और मनकामेश्वर मंदिर प्रबंधन के बीच चल रहे डकैती के मुकदमे में बृहस्पतिवार को फैसला आ गया। अतिरिक्त जिला जज (एकादश) नीरज कुमार बख्शी ने सभी को बरी करने के आदेश किए।
इस बहुचर्चित मामले में मनकामेश्वर मंदिर के प्रबंधक हरिहर पुरी ने रामलीला कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष और विधायक जगन प्रसाद गर्ग (अब दिवंगत) समेत 8 लोगों को आरोपी बनाते हुए मंदिर में दिनदहाड़े डकैती डालने और लाखों रुपये के स्वर्ण आभूषण, नकदी लूट ले जाने का मुकदमा दर्ज कराया था।कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिदत्त शर्मा ने बताया कि मंटोला थाने में वर्ष 2013 में केस दर्ज हुआ। रामलीला कमेटी के तत्कालीन मंत्री रामप्रकाश अग्रवाल, उप मंत्री संजय तिवारी, ब्राह्मण सभा के राम सुरेश शर्मा, राम मित्रा शर्मा, निखिल शर्मा, राम आशीष शर्मा और बसंतकांत शर्मा को आरोपी बनाया गया था।
करीब 10 साल तक चले मुकदमे के दौरान स्वास्थ्य कारणों से विधायक जगन प्रसाद गर्ग, रामप्रकाश अग्रवाल, रामसुरेश शर्मा, राम मित्रा शर्मा और निखिल शर्मा दिवंगत हो गए। वर्तमान में उप मंत्री संजय तिवारी, राम आशीष शर्मा और बसंतकांत शर्मा ही इस मुकदमे में आरोपी बचे थे।
कैबिनेट मंत्री ने भी दी थी गवाही
इस मुकदमे में भाजपा के तत्कालीन विधायक और वर्तमान कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी अभियुक्तों के पक्ष में गवाही दी थी। कहा था कि डकैती जैसी कोई वारदात नहीं हुई। यह केवल बारहद्वारी पर अवैध कब्जे के विरोध का मामला था। उधर, हरिहर पुरी की ओर से लक्ष्मी देवी, थानेश्वर तिवारी आदि ने गवाही दी थी।
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पुलिस ने लगा दी एफआर, कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
अप्रैल 2013 में रामलीला कमेटी ने मनकामेश्वर मंदिर के निकट स्थित बारहद्वारी में सभा करते हुए हरिहर पुरी पर अवैध कब्जा करने और बारहद्वारी के हॉल में अवैध दरवाजे निकाल लेने का आरोप लगाया था। इसका विरोध करते हुए रामलीला कमेटी ने हरिहर पुरी की ओर से बनवाए दरवाजों पर ताला लगा दिया था। तब दोनों पक्षों में विवाद निपटाना भी तय हो गया था, लेकिन हरिहर पुरी ने दो माह तक शांत रहने के बाद इस मामले में पुलिस और कोर्ट में शिकायत की थी। पुलिस ने इस मामले में एफआर लगा दी थी। इस पर हरिहर पुरी ने आपत्ति दाखिल की, जिसको न्यायालय ने वाद पत्र के रूप में स्वीकार किया, हरिहर पुरी व उनके गवाहों के साक्ष्य लेने के उपरांत अभियुक्तों को डकैती की धाराओं में तलब किया और चार्ज लगाकर विचारण किया।
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हरिहर पुरी ने किया था जल्द फैसले का अनुरोध
इस मामले में हरिहर पुरी ने पिछले दिनों उच्च न्यायालय में आवेदन देकर जल्द फैसला दिलवाने का अनुरोध किया था। उच्च न्यायालय ने इस मामले में तीन माह के भीतर फैसला देने के निर्देश दिए थे।