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मथुरा में होली पर होगी 'अग्निपरीक्षा': 'प्रहलाद के गांव' में आग से गुजरेगा पंडा, एक माह पहले से ही शुरू किया तप
Wed, 16 Feb 2022 12:26 PM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 16 Feb 2022 12:26 PM IST
सार
मथुरा के फालैन गांव में होली पर हर वर्ष यह परंपरा होती है, जिसमें होलिका दहन के बाद आग से पंडा गुजरता है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ब्रज की होली दुनियाभर में जानी जाती है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। 40 दिन तक रंगोत्सव मनाया जाता है। हर दिन कार्यक्रम होते हैं। इनमें भक्त प्रह्लाद की लीला भी शामिल हैं, जो हर वर्ष मथुरा के गांव फालैन में होती है। गांव फालैन में होली पर एक पंडा धधकते हुए अंगारों पर चलता है। इसके लिए पंडा ने एक महीने पहले से ही तप शुरू कर दिया है।
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गांव फालैन में प्रह्लाद और होलिका दहन की पौराणिक गाथा की परंपरा एक बार फिर जीवंत होगी। होलिका के दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की अग्निपरीक्षा देने को मोनू पंडा बुधवार से एक माह के कठोर तप पर बैठ गया है। होलिका दहन के दिन जब दीपक की लौ उसकी हथेली को शीतलता का एहसास कराएगी तब पंडा के कदम होलिका की लपटों को चीरते हुए आगे बढ़ जाएंगे।
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गांव में है प्रह्लाद का मंदिर
गांव फालैन को प्रह्लादनगरी के नाम से जाना जाता है। इस बार भी मोनू पंडा बुधवार को पूर्णिमा के दिन सुबह गांव की परिक्रमा लगाकर प्रह्लाद मंदिर पर तप पर बैठ जाएगा। होलिका की लग्न निर्धारित होने के बाद आसपास के सात गांव मिलकर प्रहलाद मंदिर के पास विशाल होलिका तैयार करेंगे।
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होलिका दहन के दिन मोनू पंडा को मंदिर की ज्योति पर हाथ रख शुभ लग्न के संकेत मिलने का इंतजार करेगा। जैसे ही ज्योति की लौ से शीतलता का आभास होगा पंडा के इशारे पर होलिका में अग्नि प्रवेश करा दी जाएगी। इसके बाद प्रहलाद कुंड में स्नान कर पंडा होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरेगा।
- पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा।
- मंदिर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सेवन करेगा।
- जमीन पर ही सोना होगा, प्रह्लाद कुंड में स्नान के बाद ध्यान लगाएगा।
- तप के दौरान गांव की सीमा से बाहर नहीं जा सकेगा।
- किसी भी महिला या पुरुष श्रद्धालु को अपने पैर नहीं छूने देगा।
पंडा को ये करना होगा पालन
- पूर्णिमा के दिन घर परिवार को त्याग देगा।- पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा।
- मंदिर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सेवन करेगा।
- जमीन पर ही सोना होगा, प्रह्लाद कुंड में स्नान के बाद ध्यान लगाएगा।
- तप के दौरान गांव की सीमा से बाहर नहीं जा सकेगा।
- किसी भी महिला या पुरुष श्रद्धालु को अपने पैर नहीं छूने देगा।