आगरा: 10 माह की अबोध बच्ची से 'दरिंदगी' करने वाले युवक को आजीवन कारावास की सजा
- कागारौल क्षेत्र में हुई थी घटना, बयान से मुकरा था पीड़ित का पिता
- चिकित्सक के बयान और परीक्षण रिपोर्ट पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
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आगरा में स्पेशल जज पोक्सो एक्ट वीके जैसवाल ने कागारौल में 10 माह की अबोध बच्ची से अप्राकृतिक कृत्य और पोक्सो एक्ट के आरोपी सचिन को दोषी पाया है। अदालत ने सोमवार को उसे आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की राशि पीड़िता को देने के आदेश भी किए गए हैं।
घटना 20 अगस्त 2016 की है। कागारौल क्षेत्र का रहने वाला सचिन दस महीने की अबोध बच्ची को दादा की गोद से खिलाने के बहाने ले गया था। कुछ देर बाद वापस आया। बच्ची रो रही थी। उसके खून निकल रहा था। इस पर बच्ची को परिजन अस्पताल ले गए।
पिता ने सचिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इसमें अप्राकृतिक कृत्य का आरोप लगाया। महिला चिकित्सालय में महिला चिकित्साधिकारी डॉ. ममता किरन ने बच्ची का चिकित्सीय परीक्षण किया। उन्होंने रिपोर्ट दी कि बच्ची से प्राकृतिक और अप्राकृतिक कृत्य किया गया है। आरोपी के नाबालिग होने के कारण किशोर न्यायालय में भेजा गया।
छह गवाह कोर्ट में किए गए पेश
28 जनवरी 2017 को किशोर न्यायालय (किशोर न्याय बोर्ड) ने आरोपी का विचारण वयस्क अपराधी के रूप में किए जाने के लिए पत्रावली विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट की कोर्ट में भेज दी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक विमिलेश आनंद ने वादी मुकदमा, उसके पिता और चिकित्सक डॉ. ममता किरन सहित छह गवाह कोर्ट में पेश किए।
पीड़िता के दादा ने पुलिस को पूर्व में आरोपी के खिलाफ बयान दिया था। मगर, कोर्ट में बयान से मुकर गए। उन्होंने बयान में कहा कि सचिन पूरे गांव का होशियार लड़का है। सचिन बिटिया को उन्हें गोद में दे रहा था। तभी बच्ची बकरी बांधने के खूंटे पर गिर गई, जिससे उसके चोट लग गई। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी और स्वतंत्र गवाह भी नहीं था।
आरोपी का कृत्य दिल दहलाने वाला है : कोर्ट
विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट ने महिला चिकित्सक की रिपोर्ट और उनके बयान के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि अभियुक्त ने 10 माह की अबोध बच्ची से दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य किया। आरोपी का यह कृत्य दिल दहला देने वाला है। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उसका कृत्य समाज में भय उत्पन्न करने वाला है।
आरोपी बच्ची को खिलाने ले जाता था। उसका कृत्य अक्षम्य है। उसके अपराध को देखते हुए कड़ी से कड़ी सजा का पात्र है। कोर्ट ने दोषी को धारा 377 और पोक्सो एक्ट के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा होने पर धनराशि पीड़िता को दिलाने के आदेश किए। एक लाख प्रतिकर दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करने के आदेश किए हैं।