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कोरोना महामारी के बीच 731 अतिकुपोषितों का जीवन लगा दांव पर
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जिला अस्पताल में बंद पड़ा पोषण पुनर्वास केंद्र
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। कोरोना महामारी के बीच कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। जिले के 2372 कुपोषित और 731 अति कुपोषित बच्चों का जीवन दांव पर लगा हुआ है। अति कुपोषित बच्चों की संस्थागत देखभाल के निर्देश हैं, लेकिन ये बच्चे घर पर केवल पुष्टहार पर ही निर्भर हैं। पोषण वार्ड में दर्ज रिकार्ड के अनुसार पिछले साढ़े चार महीने में मात्र पांच बच्चे ही केंद्र पर भर्ती कराए गए हैं।
बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए बाल पोषण योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए शासन की गाइड लाइन भी है। हर सप्ताह बच्चे का वजन करने के साथ ही उसकी स्थिति की जांच के आदेश हैं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। शासनादेश के तहत अति कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड के पोषण केंद्र की स्थापना की गई है।
विभागीय रिकार्ड पर यदि नजर डालें तो 25 मार्च से 30 जून तक इस केंद्र पर बच्चों को लाने की पूरी पाबंदी रही। जुलाई से बच्चों को भर्ती करने का कार्य फिर से शुरू हुआ, लेकिन जुलाई में मात्र चार बच्चे ही भर्ती कराए गए। जबकि अगस्त में पिछले 18 दिन में मात्र एक बच्चा भर्ती किया गया। जबकि जिले में वर्तमान में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 731 है।
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तीन महीने देरी से शुरू हुआ टीकाकरण माह
नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि कोराना महामारी के कारण मई में आयोजित होने वाला बाल पोषण माह इस बार 13 अगस्त से 12 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इस माह में नौ माह से पांच वर्ष तक के 2,33,741 बच्चों का टीकाकरण किया जाना है। टीकाकरण के लिए गांव-गांव केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। जिन पर एएनएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे आशा और आंगनबाड़ी की मदद से बच्चों को वजन करने के साथ ही बिटामिन ए की खुराक दें।
बच्चों के साथ तीमारदार के लिए भी है व्यवस्था
अतिकुपोषित बच्चों को संस्थागत पोषण देने के लिए जिला अस्पताल में पोषण केंद्र की स्थापना की गई है। नोडल अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि यहां बच्चे के साथ ही तीमारदार के लिए भी भोजन की व्यवस्था है। साथ रहने वाले तीमारदार को हर रोज 100 रुपये की धनराशि भी देने की व्यवस्था है। 25 मार्च से पहले इस केंद्र पर बेड खाली नहीं मिलते थे, लेकिन साढ़े चार महीने में मात्र पांच बच्चे ही केंद्र पर रखे गए हैं।
बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। पोषण माह का आयोजन कर बच्चों का टीकाकरण कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी की मदद से बच्चों को पोषाहार भी दिलवाया जा रहा है।
डॉ. एके पांडेय, सीएमओ
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बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए बाल पोषण योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए शासन की गाइड लाइन भी है। हर सप्ताह बच्चे का वजन करने के साथ ही उसकी स्थिति की जांच के आदेश हैं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। शासनादेश के तहत अति कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड के पोषण केंद्र की स्थापना की गई है।
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विभागीय रिकार्ड पर यदि नजर डालें तो 25 मार्च से 30 जून तक इस केंद्र पर बच्चों को लाने की पूरी पाबंदी रही। जुलाई से बच्चों को भर्ती करने का कार्य फिर से शुरू हुआ, लेकिन जुलाई में मात्र चार बच्चे ही भर्ती कराए गए। जबकि अगस्त में पिछले 18 दिन में मात्र एक बच्चा भर्ती किया गया। जबकि जिले में वर्तमान में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 731 है।
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तीन महीने देरी से शुरू हुआ टीकाकरण माह
नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि कोराना महामारी के कारण मई में आयोजित होने वाला बाल पोषण माह इस बार 13 अगस्त से 12 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इस माह में नौ माह से पांच वर्ष तक के 2,33,741 बच्चों का टीकाकरण किया जाना है। टीकाकरण के लिए गांव-गांव केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। जिन पर एएनएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे आशा और आंगनबाड़ी की मदद से बच्चों को वजन करने के साथ ही बिटामिन ए की खुराक दें।
बच्चों के साथ तीमारदार के लिए भी है व्यवस्था
अतिकुपोषित बच्चों को संस्थागत पोषण देने के लिए जिला अस्पताल में पोषण केंद्र की स्थापना की गई है। नोडल अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि यहां बच्चे के साथ ही तीमारदार के लिए भी भोजन की व्यवस्था है। साथ रहने वाले तीमारदार को हर रोज 100 रुपये की धनराशि भी देने की व्यवस्था है। 25 मार्च से पहले इस केंद्र पर बेड खाली नहीं मिलते थे, लेकिन साढ़े चार महीने में मात्र पांच बच्चे ही केंद्र पर रखे गए हैं।
बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। पोषण माह का आयोजन कर बच्चों का टीकाकरण कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी की मदद से बच्चों को पोषाहार भी दिलवाया जा रहा है।
डॉ. एके पांडेय, सीएमओ