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Makar Sankranti 2024: शतभिषा नक्षत्र में मकर संक्रांति, 14 या 15 जनवरी, जानें कब मनाया जाएगा खिचड़ी का त्योहार
Mon, 08 Jan 2024 12:02 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 08 Jan 2024 12:02 AM IST
सार
मकर संक्रांति को लेकर मन में कोई भी असमंजस की स्थिति है तो जान लें कि इस बार खिचड़ी का ये पर्व शतभिषा नक्षत्र में मनाया जाएगा। भगवान भास्कर 15 जनवरी की भोर में मकर राशि में संक्रमण करेंगे। ऐसे में ये पर्व 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा।
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मकर संक्रांति 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मथुरा में मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी। शतभिषा नक्षत्र में कुंभ राशि के चंद्रमा होंगे। 15 जनवरी को भोर में 2:44 बजे भगवान भास्कर सूर्य देव मकर राशि में संक्रमण करेंगे। इसके साथ ही मकर संक्रांति आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही विवाह सहित अन्य मंगल कार्य भी आरंभ हो जाएंगे।
दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान मथुरा के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि जब सूर्य भगवान धनु राशि को भोग करके मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस संक्रमण समय के लिए मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस बार 15 जनवरी को सूर्योदय इसी राशि में होगा। जिसके कारण 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इसी दिन से उत्तरायण प्रारंभ हो जाते हैं। 6 महीना तक उत्तरायण रहता है और देवयान का प्रारंभ हो जाता है। दिन बड़े होने लग जाते हैं और रात्रि छोटी होने लग जाती हैं। उत्तरायण के होने पर विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य भी प्रारंभ हो जाते हैं।
शरद चतुर्वेदी साहित्याचार्य ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवता गण पृथ्वी पर वेष बदलकर आते हैं और मनुष्य द्वारा किए दान धर्म पुण्य का 100 गुना फल प्रदान करते हैं। इस दिन गंगा-यमुना अथवा नदी आदि स्थानों पर स्नान करना चाहिए। खिचड़ी, गर्म वस्त्र, सौभाग्य वस्तुएं, गुड़, तिल, चना, दक्षिणा आदि दान दिया जाता है।
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अनेक नामों से जानी जाती है मकर संक्रांति
मकर संक्रांति पर्व को अनेक नामों से जाना जाता है। इससे एक दिन पूर्व लोहड़ी नाम से तथा मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी, महाराष्ट्र में ताल गुल, दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है।
दधि मंथन दान से होती है संतान प्राप्ति
ज्योतिषाचार्य सौरभ शास्त्री ऋषभदेव ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करके एक मटकी में माखन और दही रखकर दान करें। इसे दधि मंथन दान कहते हैं। इससे सुंदर संतान की प्राप्ति होती है। जसोदा मैया और नंद बाबा ने भी मकर संक्रांति को दही मंथन दान किया था जिसके चलते भगवान गोविंद की प्राप्ति हुई।
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दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान मथुरा के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि जब सूर्य भगवान धनु राशि को भोग करके मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस संक्रमण समय के लिए मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस बार 15 जनवरी को सूर्योदय इसी राशि में होगा। जिसके कारण 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इसी दिन से उत्तरायण प्रारंभ हो जाते हैं। 6 महीना तक उत्तरायण रहता है और देवयान का प्रारंभ हो जाता है। दिन बड़े होने लग जाते हैं और रात्रि छोटी होने लग जाती हैं। उत्तरायण के होने पर विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य भी प्रारंभ हो जाते हैं।
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शरद चतुर्वेदी साहित्याचार्य ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवता गण पृथ्वी पर वेष बदलकर आते हैं और मनुष्य द्वारा किए दान धर्म पुण्य का 100 गुना फल प्रदान करते हैं। इस दिन गंगा-यमुना अथवा नदी आदि स्थानों पर स्नान करना चाहिए। खिचड़ी, गर्म वस्त्र, सौभाग्य वस्तुएं, गुड़, तिल, चना, दक्षिणा आदि दान दिया जाता है।
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अनेक नामों से जानी जाती है मकर संक्रांति
मकर संक्रांति पर्व को अनेक नामों से जाना जाता है। इससे एक दिन पूर्व लोहड़ी नाम से तथा मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी, महाराष्ट्र में ताल गुल, दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है।
दधि मंथन दान से होती है संतान प्राप्ति
ज्योतिषाचार्य सौरभ शास्त्री ऋषभदेव ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करके एक मटकी में माखन और दही रखकर दान करें। इसे दधि मंथन दान कहते हैं। इससे सुंदर संतान की प्राप्ति होती है। जसोदा मैया और नंद बाबा ने भी मकर संक्रांति को दही मंथन दान किया था जिसके चलते भगवान गोविंद की प्राप्ति हुई।