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आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में 69वें स्थान पर पहुंचा मैनपुरी
सार
आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम) शिकायतों के निस्तारण के आधार पर जारी होने वाले रैंकिंग में मैनपुरी औंधे मुंह गिरा है।वर्तमान में मैनपुरी जिले के विभिन्न अधिकारियों के स्तर पर 67 शिकायतें डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं।
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विस्तार
मैनपुरी। आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम) शिकायतों के निस्तारण के आधार पर जारी होने वाले रैंकिंग में मैनपुरी औंधे मुंह गिरा है। प्रदेश के 75 जिलों में मैनपुरी को 69वां स्थान मिला है। जिले में तैनात अफसरों की लापरवाही का ये नतीजा है कि एक माह में आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण की रैंकिंग 58 पर पायदान गिरी है, लेकिन अब भी अफसरों की नींद नहीं टूटी है।
शासन ने घर बैठे ऑनलाइन शिकायत करने के लिए आईजीआरएस पोर्टल की शुरुआत की थी। इसके तहत मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी से संदर्भ रखने वाली शिकायतें की जाती हैं। ये शिकायतें अधिकारियों द्वारा संबंधित को स्थानांतरित भी की जा सकती हैं। प्रत्येक माह शासन की ओर से आने वाली शिकायतों और उनके निस्तारण की समीक्षा करते हुए रैंकिंग जारी की जाती है। अगस्त में प्राप्त शिकायतों के आधार पर जारी रैंकिंग में मैनपुरी फिसड्डी रहा है। प्रदेश के कुल 75 जिलों में मैनपुरी को 69वां स्थान प्राप्त हुआ। इसके पीछे जिले के लापरवाही अफसर जिम्मेदार हैं। उनके लॉगिन पर सैकड़ों शिकायतें लंबित हैं, लेकिन वे उनके निस्तारण पर ध्यान ही नहीं देते हैं। हाल ये है कि वर्तमान में 47 अधिकारियों के पास 2305 शिकायतें विभिन्न संदर्भों की लंबित हैं। इसमें सर्वाधिक 216 शिकायतें तहसीलदार सदर और तहसीलदार भोगांव के स्तर पर 179 शिकायतें लंबित हैं। जुलाई में जारी रैंकिंग की अगर बात करें तो मैनपुरी को प्रदेश में 11वां स्थान मिला था।
जिले की आईजीआरएस रैंकिंग जारी होने के बाद डीएम अविनाश कृष्ण सिंह ने लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी भी दी है। उन्होंने लंबित शिकायतों का तत्काल निस्तारण न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही किसी भी हाल में शिकायतों को डिफॉल्टर न होने देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देशित किया है कि अधिकारी खुद रुचि लेकर शिकायतों का निस्तारण कराएं, अन्यथा किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
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वर्तमान में मैनपुरी जिले के विभिन्न अधिकारियों के स्तर पर 67 शिकायतें डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं। यानी ये वे शिकायतें हैं जिनका निर्धारित समय में निस्तारण ही नहीं किया गया है। इसमें सर्वाधिक डिफॉल्टर शिकायतें अधिशासी अधिकारी नगर पालिका मैनपुरी की 12 हैं। वहीं इसके बाद तहसीलदार सदर और अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग के स्तर पर नौ-नौ शिकायतें डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं।
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शासन ने घर बैठे ऑनलाइन शिकायत करने के लिए आईजीआरएस पोर्टल की शुरुआत की थी। इसके तहत मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी से संदर्भ रखने वाली शिकायतें की जाती हैं। ये शिकायतें अधिकारियों द्वारा संबंधित को स्थानांतरित भी की जा सकती हैं। प्रत्येक माह शासन की ओर से आने वाली शिकायतों और उनके निस्तारण की समीक्षा करते हुए रैंकिंग जारी की जाती है। अगस्त में प्राप्त शिकायतों के आधार पर जारी रैंकिंग में मैनपुरी फिसड्डी रहा है। प्रदेश के कुल 75 जिलों में मैनपुरी को 69वां स्थान प्राप्त हुआ। इसके पीछे जिले के लापरवाही अफसर जिम्मेदार हैं। उनके लॉगिन पर सैकड़ों शिकायतें लंबित हैं, लेकिन वे उनके निस्तारण पर ध्यान ही नहीं देते हैं। हाल ये है कि वर्तमान में 47 अधिकारियों के पास 2305 शिकायतें विभिन्न संदर्भों की लंबित हैं। इसमें सर्वाधिक 216 शिकायतें तहसीलदार सदर और तहसीलदार भोगांव के स्तर पर 179 शिकायतें लंबित हैं। जुलाई में जारी रैंकिंग की अगर बात करें तो मैनपुरी को प्रदेश में 11वां स्थान मिला था।
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जिले की आईजीआरएस रैंकिंग जारी होने के बाद डीएम अविनाश कृष्ण सिंह ने लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी भी दी है। उन्होंने लंबित शिकायतों का तत्काल निस्तारण न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही किसी भी हाल में शिकायतों को डिफॉल्टर न होने देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देशित किया है कि अधिकारी खुद रुचि लेकर शिकायतों का निस्तारण कराएं, अन्यथा किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
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वर्तमान में मैनपुरी जिले के विभिन्न अधिकारियों के स्तर पर 67 शिकायतें डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं। यानी ये वे शिकायतें हैं जिनका निर्धारित समय में निस्तारण ही नहीं किया गया है। इसमें सर्वाधिक डिफॉल्टर शिकायतें अधिशासी अधिकारी नगर पालिका मैनपुरी की 12 हैं। वहीं इसके बाद तहसीलदार सदर और अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग के स्तर पर नौ-नौ शिकायतें डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं।